लखनऊ, 30 मई 2026:
यूपी में जारी बिजली संकट के बीच अब उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिल का झटका भी लगने वाला है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने जून माह से बिजली उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (एफपीपीए) सरचार्ज लागू करने का आदेश जारी किया है। इसके बाद प्रदेश के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी उपभोक्ता का मासिक बिजली बिल 100 रुपये आता था तो उसे अब 110 रुपये का भुगतान करना होगा। यह अतिरिक्त राशि फ्यूल सरचार्ज के रूप में जून के बिल में जोड़ी जाएगी। नए नियमों के अनुसार ईंधन अधिभार की दर हर महीने बिजली उत्पादन और खरीद लागत के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है।
पावर कॉरपोरेशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मार्च माह के लिए फ्यूल सरचार्ज की वास्तविक दर 20.61 प्रतिशत बनती है लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं से केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क ही वसूला जाएगा। विभाग का तर्क है कि बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन तथा बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।
हालांकि इस फैसले ने नया विवाद भी खड़ा कर दिया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरचार्ज बढ़ोतरी का कड़ा विरोध करते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन महंगी बिजली खरीद के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली की तैयारी कर रहा है।
परिषद के अनुसार विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में बिजली खरीद की लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट मंजूर की थी जबकि मार्च 2026 में कॉरपोरेशन ने करीब 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दर्शाई। इससे उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा है। परिषद का दावा है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का पहले से ही 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस मौजूद है। इसलिए अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है।
मिडिल ईस्ट संकट के चलते ईंधन की कीमतों में आई तेजी को भी बिजली महंगी होने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और नियामक संस्थाएं उपभोक्ताओं की चिंताओं पर क्या कदम उठाती हैं।






