न्यूज डेस्क, 31 मई 2026:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मन की बात कार्यक्रम के 134वें संस्करण में देशवासियों से रूबरू हुए। पीएम ने भारत की खेल उपलब्धियों से लेकर पारंपरिक खानपान, खगोल विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत तक कई विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश के खिलाड़ी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, वहीं भारतीय रसोई में मौजूद पारंपरिक पेय गर्मी से बचाव का आसान और असरदार तरीका हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत खेल जगत की उपलब्धियों से करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय एथलीट अपनी मेहनत और शानदार प्रदर्शन से दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने रांची में हुई 29वीं राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए बताया कि प्रतियोगिता में चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे। गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उन्हें बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड महज दो दिनों में तीन बार टूटा, जो भारतीय एथलेटिक्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों की तैयारी का बड़ा संकेत है। उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह और अनीमेष कुजूर की सराहना करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी लगातार नई ऊंचाइयां छू रहे हैं।
गर्मी के मौसम का जिक्र करते हुए मोदी ने लोगों से सेहत का ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग इलाकों में गर्मी से राहत देने वाले कई पारंपरिक पेय आज भी लोगों की जिंदगी का हिस्सा हैं। उत्तर भारत के आम पना, पंजाब और हरियाणा की लस्सी, राजस्थान और गुजरात की छाछ, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सत्तू शरबत का नाम लिया। उन्होंने कहा कि ये पेय हमारी रसोई से निकली ऐसी विरासत हैं जो स्वाद के साथ सेहत भी देती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गर्मियों का मौसम आते ही आम की चर्चा शुरू हो जाती है। आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वाद और बचपन की यादों का अहम हिस्सा है।
कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के बीच बढ़ती अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान की रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशभर में एस्ट्रोनॉमी क्लब तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के लिए इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं।
सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि नीदरलैंड में आयोजित एक समारोह के दौरान चोल काल के प्राचीन तांबे के अभिलेख भारत को वापस सौंपे गए। उन्होंने इसे देश की ऐतिहासिक धरोहर की वापसी बताते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।






