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मेधा को मिला सम्मान : 223 टॉपर्स को एक लाख, टैबलेट और मेडल, योगी बोले- छात्राएं मेहनत में आगे, छात्र लें प्रेरणा

लखनऊ के लोकभवन में मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह, नकलविहीन परीक्षा व्यवस्था को सीएम ने बताया यूपी की बड़ी उपलब्धि, जिलों में 1459 छात्रों का भी हुआ सम्मान

लखनऊ, 1 जून 2026:

यूपी की नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए सोमवार को राजधानी के लोकभवन में भव्य मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई और आईसीएसई के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के 223 राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये की धनराशि, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को भी शॉल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि परिश्रम का परिणाम हमेशा सुखद और प्रेरणादायक होता है। उन्होंने मेरिट सूची में छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि घर के कार्यों में माता-पिता का सहयोग करने के बावजूद छात्राएं पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में छात्रों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तर पर सम्मानित किए जा रहे 223 विद्यार्थियों के अलावा जिला स्तर पर टॉप-10 में स्थान पाने वाले 1459 छात्रों को जनपदों में सम्मानित किया गया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य स्तरीय मेधावियों में 85 छात्र और 138 छात्राएं शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल वर्ग में 115 मेधावियों में 34 छात्र और 81 छात्राएं हैं जबकि इंटरमीडिएट में 9 छात्र और 14 छात्राएं मेरिट सूची में स्थान बनाने में सफल रही हैं।

अपने चुटीले अंदाज में मुख्यमंत्री ने कहा कि लगता है अब लड़के झाड़ू-पोंछा ज्यादा लगाने लगे हैं। मोहल्ले के कामों में भी व्यस्त रहते हैं, इसलिए छात्राओं से पीछे रह गए हैं। उन्होंने छात्रों से छात्राओं की मेहनत, अनुशासन और समय प्रबंधन से सीख लेने की अपील की।

सीएम योगी ने प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था में आए बदलावों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नौ वर्ष पहले नकल के कारण मेरिट और डी-मेरिट का अंतर समझना मुश्किल था लेकिन आज उत्तर प्रदेश में नकलविहीन परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को डराना नहीं है। उनमें आत्मविश्वास पैदा करना होना चाहिए। प्रश्नपत्र ऐसे हों जिन्हें विद्यार्थी अपने प्रयास और ज्ञान के आधार पर हल कर सकें।

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कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के बीच शीर्ष स्थान प्राप्त करना कठिन परिश्रम, समर्पण और निरंतर प्रयास का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने और जीवन में चुनौतियों का सामना संकल्प के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अंतिम मंजिल नहीं बल्कि एक उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत है।

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