लखनऊ, 5 जून 2026:
विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से प्रकृति, जल स्रोतों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभाना हर नागरिक का फर्ज है। भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और तस्करों से पर्यावरण को बचाने के लिए समाज को जागरूक रहना होगा।
सीएम शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों से मुलाकात की, उन्हें चॉकलेट वितरित की और कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने वृक्ष कलश में जल अर्पित किया और बच्चों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही यह अभियान सफल हो सकता है। उन्होंने लोगों को पांच संकल्प दिलाए। इनमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, लगाए गए पौधों की सुरक्षा करना, जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाना और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीना शामिल है। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि कहीं कोई टोंटी चोरी कर रहा है या पानी बेवजह बहा रहा है तो ऐसे लोगों को टोकना चाहिए। पानी की एक-एक बूंद बचाना आज की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल है तो कल है और वन है तो जीवन है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में मौसम चक्र में बड़ा बदलाव आया है। मौसम का संतुलन बिगड़ने का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। अतिवृष्टि, अनावृष्टि और असमय आने वाली प्राकृतिक आपदाएं जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को जीवन का आधार माना गया है। हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों में पशु-पक्षियों तथा पेड़-पौधों के प्रति सम्मान का भाव दिखाई देता है। यही सोच पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।
कुकरैल वन क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित क्षेत्र किसी भी शहर के तापमान को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ शहर की तुलना में कुकरैल क्षेत्र का तापमान कई बार पांच डिग्री तक कम महसूस होता है। अवैध कब्जे हटाने के बाद वहां प्राकृतिक वातावरण को बेहतर बनाने की दिशा में काम हुआ है और सौमित्र वन इसका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ हवा, साफ पानी, उपजाऊ जमीन और हरे-भरे जंगल मानव सभ्यता की जीवनरेखा हैं। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानवता सुरक्षित रह सकेगी। उन्होंने जल जीवन मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की जरूरत बनी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में पांच करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं, जबकि जुलाई में एक दिन के भीतर 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जैव विविधता के क्षरण और जल संकट को पर्यावरण के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि वातावरण में बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसें और प्रदूषक तत्व मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ मौसम चक्र को भी प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने ग्राम प्रधानों, नगर निकायों के अध्यक्षों और महापौरों से तालाब, पोखर, कुएं और बावड़ियों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन के लिए आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर एक्सप्रेसवे, फोरलेन और सिक्सलेन सड़कें बनी हैं, लेकिन इसके साथ ही वन क्षेत्र बढ़ाने में भी सफलता मिली है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना, वन राज्यमंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव वन वी हेकाली झिमोमी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमुरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।






