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बलिया के सुरहा ताल ने पहना रामसर का ताज… विदेशी सैलानियों के लिए खुले नए रास्ते

बलिया के जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार को रामसर साइट का दर्जा मिलने से वैश्विक पहचान मिली, प्रदेश का यह 13वां और देश का 100वां रामसर स्थल बना, सुरहा ताल के आसपास करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रहीं, स्थानीय रोजगार और पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद

लखनऊ, 5 जून 2026:

बलिया जिले में स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार यानी सुरहा ताल को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद यह वेटलैंड अब अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रही है। इस दर्जे के साथ विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आमदनी के नए अवसर भी तैयार होंगे।

प्रदेश सरकार के मुताबिक सुरहा ताल के आसपास पर्यटकों की सुविधा बढ़ाने के लिए तेजी से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से सुरहा ताल के निकट मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजना पर काम चल रहा है।

ओपन एयर थिएटर से बर्ड वाचिंग टावर तक तैयार होंगी सुविधाएं

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परियोजना के तहत ओपन एयर थिएटर, पाथवे, उद्यान विकास, साइनेज, बच्चों के लिए विशेष क्षेत्र, मल्टीपर्पज हॉल, घाटों का विकास, बर्ड वाचिंग टावर, कियोस्क, इंटरप्रिटेशन गैलरी और बैठने की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मकसद यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

प्रवासी पक्षियों का अहम ठिकाना है सुरहा ताल

सुरहा ताल अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा कई स्थानीय पक्षी प्रजातियों का भी यह महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र है। रामसर साइट का दर्जा मिलने से इस आर्द्रभूमि के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी।

चार महीने में मिलीं तीन नई रामसर साइट्स

उत्तर प्रदेश को इस साल फरवरी से अब तक तीन नई रामसर साइट्स मिली हैं। फरवरी में एटा का पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार और अब बलिया का सुरहा ताल इस सूची में शामिल हुआ है। इसके साथ ही प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि नए रामसर स्थलों की अधिसूचना से घरेलू और विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण जैव विविधता, जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या है रामसर कन्वेंशन

वेटलैंड के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए रामसर कन्वेंशन की शुरुआत वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। इस अंतरराष्ट्रीय संधि का उद्देश्य दुनिया की महत्वपूर्ण वेटलैंड की पहचान कर उनके संरक्षण और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

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