लखनऊ, 6 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा में विशेष रूप से देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया और कथा सुनी।
कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया था। उनका कहना था कि यदि यह अभियान दो दिन और चलता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) भी भारत का हिस्सा बन जाता। उन्होंने बताया कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दीक्षा के समय उनसे गुरु दक्षिणा मांगने की इच्छा जताई थी, जिस पर उन्होंने केवल एक ही मांग रखी थी। वह थी- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की भारत में वापसी।

रामभद्राचार्य ने राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए कहा कि वर्ष 2029 में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनेगी और राजनाथ सिंह एक बार फिर देश के रक्षा मंत्री के रूप में सेवा करेंगे। उन्होंने रक्षा मंत्री की ओर संकेत करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व उनके कंधों पर है।
इस अवसर पर रामभद्राचार्य ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने तथा रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि सैकड़ों ग्रंथों की रचना और डेढ़ लाख पृष्ठ कंठस्थ होने के बावजूद उन्हें रामचरितमानस जैसा अद्वितीय ग्रंथ कहीं दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार रामचरितमानस में राष्ट्र की अवधारणा समाहित है। भगवान राम राष्ट्र के मंगल तथा मर्यादा के प्रतीक हैं।
इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की असाधारण स्मरण शक्ति, विद्वता और आध्यात्मिक व्यक्तित्व की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय से वह जगद्गुरु को जानते हैं। इतनी विलक्षण प्रतिभा और स्मरण शक्ति उन्होंने दुनिया में कहीं नहीं देखी। उन्होंने इसे साधना के साथ-साथ ईश्वर की विशेष कृपा का परिणाम बताया।

राजनाथ सिंह ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ऐसा अधिनियम पारित कराया था जिसके तहत जगद्गुरु रामभद्राचार्य को दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय का आजीवन कुलाधिपति बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह देश में अपने प्रकार का पहला निर्णय था।
कथा के पांचवें दिन श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक मंडल की ओर से विधायक डॉ. नीरज बोरा ने रक्षा मंत्री को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, एमएलसी अवनीश सिंह, मुकेश शर्मा, पूर्व विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह, रिटायर्ड आईएएस अफसर दिवाकर त्रिपाठी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीराम कथा सुनने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।






