लखनऊ, 4 मई 2026:
यूपी में धार्मिक पर्यटन ने नया शिखर छूआ है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल काशी में देखने को मिल रही है। मार्च महीने में काशी विश्वनाथ मंदिर में करीब 65 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा न केवल आस्था के बढ़ते प्रवाह को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश में विकसित हुई आधुनिक और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की सफलता की भी कहानी कहता है।
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के बाद मंदिर परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।पहले श्रद्धालुओं को तंग गलियों और अव्यवस्थित भीड़ का सामना करना पड़ता था लेकिन अब विशाल, भव्य और सुनियोजित परिसर ने दर्शन को आसान और सुगम बना दिया है। मंदिर तक पहुंच पहले से कहीं अधिक सरल हुई है। इससे देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सरकार द्वारा मंदिर परिसर में साफ-सफाई, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। आधुनिक शौचालय, स्वच्छ पेयजल, व्यवस्थित कतार प्रबंधन और डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं के अनुभव को नई ऊंचाई दी है। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच श्रद्धालु अब अधिक सहज और सुरक्षित माहौल में बाबा के दर्शन कर पा रहे हैं।
वाराणसी में बुनियादी ढांचे के विकास ने भी इस धार्मिक उछाल को मजबूती दी है। सड़कों का चौड़ीकरण, बेहतर परिवहन, घाटों का सौंदर्यीकरण और आकर्षक लाइटिंग ने शहर की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। गंगा नदी में शुरू हुई क्रूज सेवाएं पर्यटकों को काशी की आध्यात्मिकता को नए अंदाज में अनुभव करने का अवसर दे रही हैं।
धार्मिक पर्यटन के इस उभार का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। होटल, गेस्ट हाउस, दुकानों और अन्य व्यवसायों में तेजी आई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और स्थानीय लोगों की आय में सकारात्मक वृद्धि हुई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस बदलाव का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी के विजन और सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि काशी अब आस्था, आध्यात्म और आधुनिकता का संगम बन चुकी है। रोपवे परियोजना, मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट सिटी मिशन और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स ने काशी को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है।






