Lucknow City

कैंसर के दर्द भरे इलाज के बीच खुशनुमा सैर…यूपी पर्यटन की पहल, मरीजों ने किया ‘लखनऊ दर्शन’

विश्व कैंसर दिवस से पहले पर्यटन विभाग के प्रयास से मुस्करा उठे मरीज, इलाज के बीच सुकून की घड़ी बनी डबल डेकर बस से विरासत यात्रा

लखनऊ, 3 फरवरी 2026:

विश्व कैंसर दिवस से पहले उत्तर प्रदेश पर्यटन ने मानवीय सरोकार की एक खूबसूरत मिसाल पेश की। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से 30 कैंसर मरीजों को ‘लखनऊ दर्शन’ डबल डेकर इलेक्ट्रिक बस से शहर भ्रमण कराया गया। यह खास यात्रा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चली और नियमित लखनऊ दर्शन सेवाओं से अलग रखी गई।

मेडिकल व डॉक्टरों की टीम साथ रही

अस्पताल में लंबे इलाज से गुजर रहे मरीजों के लिए यह यात्रा राहत, सुकून और उम्मीद लेकर आई। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी में मरीजों ने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों और शहर की रौनक को नजदीक से देखा। पूरे सफर के दौरान माहौल हल्का और आत्मीय रहा, जहां चेहरे पर मुस्कान और आंखों में ताजगी साफ नजर आई।

इलाज के दबाव से बाहर निकलने का मौका

इस पहल का मकसद मरीजों को अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकालकर खुले माहौल में कुछ सुकून के पल देना था। शहर की विरासत से जुड़ाव और साथ बिताया गया समय मरीजों के मनोबल के लिए संजीवनी साबित हुआ। बस यात्रा के दौरान सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया।

मंत्री ने कहा-पर्यटन सिर्फ घूमना नहीं, जिम्मेदारी भी

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि संवेदना से जुड़ा प्रयास है। इलाज के कठिन दौर में मरीजों को सकारात्मक माहौल देना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना इसका असल उद्देश्य है। यह पहल दिखाती है कि पर्यटन समाज से जुड़ने और उम्मीद जगाने का भी जरिया बन सकता है।

मरीजों ने साझा की दिल की बात

मरीज रजनी वर्मा ने कहा कि अस्पताल के कमरे से बाहर निकलना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। विधानसभा को भीतर से देखना उनके लिए यादगार बन गया। अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि बीमारी की वजह से लंबे समय से कहीं जाना संभव नहीं था, लेकिन इस यात्रा ने उन्हें फिर से खुश होने का मौका दिया।

स्मृति चिन्ह मिला, पौष्टिक भोजन चखा

मरीजों के साथ मौजूद डॉ. अभिषेक ने कहा कि ऐसे अनुभव मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार बस में हल्का और पौष्टिक भोजन दिया गया। यात्रा के अंत में सभी मरीजों को स्मृति चिह्न भी भेंट किए गए।

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