लखनऊ, 17 मार्च 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के नगर निगम में करीब ढाई साल के इंतजार के बाद शासन ने 10 पार्षदों को नामित किया है। नगर विकास विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई है। नामित पार्षदों की सूची जारी होते ही नगर निगम की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों में भी हलचल तेज हो गई है।
नगर निगम अधिनियम के तहत सदन में पार्षदों को नियुक्त करने का प्रावधान है। शासन द्वारा नामित किए गए पार्षद नगर निगम की बैठकों और विभिन्न समितियों में भाग लेकर शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय और सुझाव दे सकेंगे। हालांकि, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार नामित पार्षद सदन की बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं लेकिन वोटिंग की स्थिति में मतदान नहीं कर सकेंगे। साथ ही निर्वाचित पार्षदों की तरह इनके लिए विकास कार्यों के लिए कोई अलग कोटा भी निर्धारित नहीं होता।

नामित पार्षदों का कार्यकाल शासन के विवेक पर निर्भर करता है। यानी शासन चाहे तो किसी भी समय इन्हें पद से हटा सकता है। जिन लोगों को नामित पार्षद बनाया गया है उनमें पुराना हैदरगंज निवासी गणेश वर्मा, विनयखंड के दीपू जायसवाल, मुरलीनगर के रूपचंद अग्रवाल, रविंद्र पल्ली के पंकज बोस, गुडंबा क्षेत्र के अतरौली निवासी किशन पाल, मानकनगर के दौदाखेड़ा निवासी संतोष सिंह बलखंडी, तेलीबाग की नेहा सिंह, विकासनगर के अखिलेश गिरि, विरामखंड गोमतीनगर की मधुबाला त्रिपाठी और सआदतगंज के पुरुषोत्तम पुरी शामिल हैं।
इनमें अखिलेश गिरि और संतोष सिंह बलखंडी पहले निर्वाचित पार्षद भी रह चुके हैं। सूची में शामिल अधिकांश नामित पार्षद शहर के विभिन्न इलाकों जैसे गोमतीनगर, मुरलीनगर, मानकनगर, विकासनगर, तेलीबाग और राजाजीपुरम सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं।
नगर निगम की बैठकों में शामिल होकर ये नामित पार्षद शहर के विकास कार्यों, योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव देकर प्रशासन को सहयोग करेंगे।






