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UP Politics : अखिलेश के ‘12 सवाल’ से मोदी सरकार पर हमला, बैंक मजबूत हुए तो जनता क्यों परेशान?

बैंक बेचने से लेकर साइबर ठगी, महंगे लोन और भर्ती तक पर घेरा, सपा प्रमुख ने पूछा- गरीबों के खाते से पैसे क्यों कट रहे, किसानों-नौजवानों को कर्ज के लिए क्यों भटकना पड़ रहा?

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026:

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को निशाने पर लेते हुए अखिलेश ने ‘बारह साल, बारह सवाल’ के जरिए बैंकों की कार्यप्रणाली, आम जनता की परेशानियों और बैंक कर्मचारियों की समस्याओं पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर देश की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, तो आम आदमी को राहत मिलने के बजाय परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में बैंकों के निजीकरण, खातों से होने वाली कटौती, बार-बार केवाईसी की अनिवार्यता और बड़े कर्ज लेकर विदेश भागने वालों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने सवाल किया कि बैंक मजबूत होने के दावों के बावजूद बैंकों को क्यों बेचा जा रहा है और गरीबों के खातों से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?

ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं पर भी सवाल

सपा प्रमुख ने ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं और एटीएम के बंद होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम लोगों को नकदी के लिए भटकना पड़ता है। उन्होंने किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और गारंटर के कर्ज उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका सवाल है कि बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होने के बावजूद जरूरतमंदों को आसानी से ऋण क्यों नहीं मिल रहा?

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साइबर ठगी और महंगे कर्ज का मुद्दा उठाया

अखिलेश ने साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को उनका पैसा वापस मिलने में होने वाली देरी पर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि पीड़ितों को बैंक और थाने के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं। इसके साथ ही होम लोन और शिक्षा लोन पर ऊंची ब्याज दरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर पैसे अटकने और सिबिल स्कोर में मामूली चूक के कारण युवाओं को कर्ज मिलने में होने वाली दिक्कतों का मुद्दा उठाया।

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बैंक कर्मचारियों की भर्ती और दबाव पर भी घेरा

सपा अध्यक्ष ने बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों को यूपीआई व ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए बैंक शाखाओं में सहायता काउंटर बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने बैंक कर्मचारियों की मांगें नहीं माने जाने, नई भर्तियां नहीं होने और मौजूदा कर्मचारियों पर बढ़ते काम के दबाव का मुद्दा भी उठाया।

अखिलेश का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था की मजबूती का आकलन केवल दावों से नहीं अपितु आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं और राहत से होना चाहिए। ‘बारह साल, बारह सवाल’ के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार से बैंकिंग व्यवस्था में आम लोगों की परेशानियों का जवाब मांगा है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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