Lucknow City

युद्धों के बीच भारत ने दुनिया को दिखाया संस्कृति संरक्षण का दम, संग्रहालय में गूंजा विरासत बचाओ संदेश

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा- संग्रहालय सिर्फ इतिहास नहीं, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम, ‘आदियोगी शिव’ टेक्सटाइल प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

लखनऊ, 19 मई 2026:

दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, संघर्ष और कट्टरता के बीच ऐतिहासिक धरोहरें और सांस्कृतिक विरासतें लगातार नष्ट हो रही हैं। वहीं भारत अपनी सभ्यता और संस्कृति को सहेजकर पूरी दुनिया के सामने संरक्षण और संवर्धन का प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। यह बात उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर मंगलवार को लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान कही।

कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री ने पाश्चात्य मूर्तिकला वीथिका का लोकार्पण और ‘संग्रहालय पुरातत्व पत्रिका-2026’ का विमोचन किया। बहुचर्चित टेक्सटाइल प्रदर्शनी ‘आदियोगी शिव : ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ का उद्घाटन भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं को सुरक्षित रखने की जगह नहीं हैं बल्कि वे देश की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते आधुनिक दौर में युवाओं का अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना बेहद जरूरी हो गया है। इसी सोच के साथ सरकार संग्रहालयों को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस कर रही है ताकि बच्चे और युवा उन्हें केवल देखने नहीं, बल्कि अनुभव करने के लिए भी प्रेरित हों। उन्होंने बताया कि छुट्टियों के दिनों में संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था भी की गई है, जिससे अधिक से अधिक लोग अपनी विरासत को करीब से समझ सकें।

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पर्यटन मंत्री ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को अपने ही प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन धरोहरों से जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध कलाकार संगीता गुप्ता की टेक्सटाइल प्रदर्शनी ‘आदियोगी शिव: ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ रही। संगीता गुप्ता ने बताया कि नील यानी इंडिगो का भारतीय इतिहास और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के स्वरूप में स्त्री और पुरुष ऊर्जा का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। इसी विचार को खादी वस्त्रों पर नील रंग के माध्यम से ‘अर्धनारीश्वर स्तोत्र’ की रचनात्मक प्रस्तुति में उकेरा गया है।

यह प्रदर्शनी 19 जून तक राज्य संग्रहालय की अस्थायी वीथिका में आम लोगों के लिए खुली रहेगी। अपर निदेशक संस्कृति सृष्टि धवन ने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 85 हजार विद्यार्थी राज्य संग्रहालय का भ्रमण कर चुके हैं। यह युवाओं में सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

संग्रहालय निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच संवाद का सबसे मजबूत माध्यम हैं। कार्यक्रम में विशेष सचिव संस्कृति विभाग संजय सिंह, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, प्रो. राजीव नयन समेत कई लोग मौजूद थे।

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