राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 5 फरवरी 2026:
अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच शुरू होने के बाद भी राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने गुरुवार को देहरादून में पत्रकार वार्ता कर सीबीआई जांच को दिखावा बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बिना पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच सरकार द्वारा कराई गई उसी एफआईआर के आधार पर चल रही है, जिस पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की सहमति से नई एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।
भाकपा माले के वरिष्ठ नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को जानबूझकर इस पूरे मामले से अलग रखा गया है और उन्हें शिकायतकर्ता तक नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा शिकायतकर्ता का मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस मामले में एक से अधिक वीआईपी शामिल हो सकते हैं और सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। साथ ही सबूत मिटाने वालों की भी जांच की मांग की।
सीपीआई के राज्य सचिव समर भंडारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बिना सीबीआई जांच से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में हालात चिंताजनक हैं और भाजपा सरकार की सच्चाई अब जनता के सामने आ चुकी है।
सपा के वरिष्ठ नेता डॉ. एसएन सचान ने कहा कि आठ फरवरी को प्रस्तावित महापंचायत में इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आठ फरवरी की महापंचायत और 16 फरवरी को होने वाले राजभवन घेराव में बड़ी संख्या में शामिल हों। इस दौरान हेमा वोरा, गरिमा दसौनी और सुरेंद्र अग्रवाल समेत इंडिया गठबंधन से जुड़े कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे।






