लखनऊ, 26 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अपने सरकारी आवास पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में प्रस्तुति देने वाले विभिन्न राज्यों के कलाकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अलग भाषाएं, अलग कलाएं और अलग परंपराएं होने के बावजूद देश का भाव एक है, जो “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की और उन्हें उत्तर प्रदेश भ्रमण का भी आमंत्रण दिया।
एक भारत-श्रेष्ठ भारत की जीवंत झलक
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकार अपने प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं की खुशबू लेकर उत्तर प्रदेश पहुंचे। वहीं, उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जरिए “विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश” विषय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। यह सांस्कृतिक समन्वय देश की एकता का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश: संस्कृति और आस्था की भूमि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। तमिलनाडु से जम्मू कश्मीर, अरुणाचल से गुजरात और महाराष्ट्र से सिक्किम तक के लोग यहां आते हैं। विविधता के बावजूद सभी का भाव एक है, जो भारत की ताकत है।

पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी बनी मिसाल
मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य अब विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ चुके हैं। त्रिपुरा से आए 28 कलाकारों की गणतंत्र दिवस परेड में भागीदारी देश की सांस्कृतिक एकता का शानदार उदाहरण है। इतनी दूर से आकर प्रस्तुति देना सराहनीय है।
भातखंडे विश्वविद्यालय की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश का पहला कला और संस्कृति को समर्पित विश्वविद्यालय है। राष्ट्रीय पर्वों, दीपोत्सव, उत्तर प्रदेश दिवस और अन्य आयोजनों में विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ संयुक्त प्रस्तुतियां तैयार करना इसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए। पूर्वांचल का बिरहा, अवध की रामकथा, ब्रज की कृष्णलीला और बुंदेलखंड का आल्हा जैसी लोककलाओं को जोड़कर प्रभावशाली कार्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए।

मथुरा, प्रयागराज और अयोध्या के कलाकारों को संदेश
मुख्यमंत्री ने मथुरा के कलाकारों से अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया। प्रयागराज के कलाकारों से कहा कि माघ मेला अब कुंभ के समान विराट रूप ले चुका है, जहां लोककलाओं को प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। अयोध्या के कलाकारों से उन्होंने दीपोत्सव में नियमित प्रस्तुति देकर अयोध्या की कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का आग्रह किया।
लोक कलाओं से सजी गणतंत्र दिवस प्रस्तुति
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के कलाकारों द्वारा शंख वादन, डमरू वादन, बधावा, मयूर और ढेढ़िया नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का कथक नृत्य कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाला रहा। वहीं, मध्य प्रदेश का बधाई नृत्य, महाराष्ट्र का लेजियम, जम्मू कश्मीर का रऊफ, सिक्किम का तमांग सेलो और गुजरात का तलवार रास भी आकर्षण का केंद्र रहा।

अयोध्या भ्रमण की विशेष व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कलाकार समूहों के प्रमुखों से बातचीत करते हुए कहा कि जब वे उत्तर प्रदेश आए हैं, तो यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण जरूर करें। जब कुछ कलाकारों ने अयोध्या जाने की इच्छा जताई, तो मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी कलाकार अयोध्या जाना चाहें, उनके लिए पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
10 राज्यों के 261 कलाकार हुए सम्मानित
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित कुल 10 राज्यों के 18 कला समूहों के 261 कलाकारों को सम्मानित किया गया। इनमें पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम और त्रिपुरा के कलाकार शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों को देश की सांस्कृतिक एकता का सच्चा प्रतिनिधि बताया।
इन कला समूहों को किया गया सम्मानित
सम्मानित किए गए कला समूहों में अरुणाचल प्रदेश के सिंघपो कल्चरल ट्रूप और निशि कल्चरल ट्रूप शामिल रहे। बिहार से झिंझिया नृत्य दल, छत्तीसगढ़ से राउत नाचा समूह, गुजरात से ढाल तलवार रास नृत्य दल और जम्मू कश्मीर से रऊफ नृत्य दल को भी सम्मान दिया गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के बधाई लोक नृत्य समूह, महाराष्ट्र के लेजियम दल और सिक्किम के तमांग सेलो नृत्य समूह को मंच पर सम्मानित किया गया। त्रिपुरा से आए बंगाली लोक नृत्य और ट्राइबल डांस समूहों की प्रस्तुतियों को भी सराहना मिली। उत्तर प्रदेश से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का कथक दल, अयोध्या के बधावा और फारूवाही लोक नृत्य समूह, मथुरा के शंखवादन और मयूर लोक नृत्य दल तथा प्रयागराज के ढेढ़िया लोक नृत्य समूह को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही दिल्ली की कोरियोग्राफी टीम को भी उनके बेहतरीन सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

पहली बार 9 राज्यों के कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस वर्ष पहली बार नौ राज्यों के कलाकारों ने विधान सभा मार्ग पर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की थीम पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसमें गुजरात, बिहार, असम, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने अपने-अपने राज्यों की लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया। अरुणाचल प्रदेश के कलाकारों ने सिंगफो और निशि जनजाति के लोक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं बिहार के मिथिलांचल का झिझिया नृत्य, छत्तीसगढ़ का राउत नाचा, गुजरात का ढाल-तलवार रास और जम्मू-कश्मीर का रऊफ नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। मध्य प्रदेश के बधाई, महाराष्ट्र के लेजियम, सिक्किम के तमांग सेलो और त्रिपुरा के जनजातीय लोक नृत्य ने विविधता में एकता की सुंदर झलक पेश की। उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भव्य प्रदर्शन किया, जिसमें भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के कथक नृत्य, अयोध्या के बधावा और फारूवाही लोक नृत्य, मथुरा का शंख वादन और मयूर लोक नृत्य तथा प्रयागराज का ढेढ़िया लोक नृत्य शामिल था। इसके अलावा, स्कूली छात्रों की टुकड़ियों ने भी राष्ट्रीय एकता की थीम पर रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। इस सांस्कृतिक आयोजन ने दर्शकों में जोश और उत्साह भर दिया और संस्कृति विभाग की इस रचनात्मक पहल ने राजधानी से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त संदेश प्रसारित किया।







