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अब अस्पतालों की ‘मनमानी’ नहीं छिपेगी! आयुष्मान मरीजों से AI करेगा पूछताछ, ऐसे खुलेगी इलाज की पोल!

योगी सरकार की नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था में मरीज बताएंगे अस्पताल का सच, इलाज मिला या नहीं, पैसे तो नहीं वसूले, स्टाफ का व्यवहार कैसा रहा? AI विश्लेषण से संदिग्ध मामलों पर होगी कार्रवाई

लखनऊ, 31 अगस्त 2026:

यूपी में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के अनुभव अब स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी का बड़ा आधार बनेंगे। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज को क्या मिला और किन परेशानियों से गुजरना पड़ा? यह जानने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। नोडल स्टेट हेल्थ एजेंसी ‘साचीज’ मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत के लिए एआई आधारित वाइस बॉट विकसित कर रही है। इसके जरिए इलाज के बाद मरीजों को फोन किया जाएगा। उनसे अस्पताल में मिले इलाज व व्यवहार का पूरा फीडबैक लिया जाएगा।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप तैयार की जा रही यह व्यवस्था सिर्फ औपचारिक फीडबैक तक सीमित नहीं रहेगी। मरीज की बात को एआई तकनीक के जरिए विश्लेषित किया जाएगा और उन प्रतिक्रियाओं को अलग किया जाएगा जिनमें किसी तरह की गड़बड़ी या कार्रवाई की जरूरत सामने आती है।

‘इलाज मिला या नहीं’ से लेकर ‘पैसे तो नहीं लिए’ तक सवाल

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एआई वाइस बॉट के जरिए मरीज से पूछा जाएगा कि उसे अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं? इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी हुई या नहीं? अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं कैसी थीं और कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा? इन सभी पहलुओं पर जानकारी ली जाएगी।

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सबसे अहम सवाल यह होगा कि आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त उपचार के बावजूद मरीज या उसके परिवार से कोई अनधिकृत रकम तो नहीं वसूली गई। मरीज से यह भी जाना जाएगा कि इलाज के बाद वह अस्पताल की सेवाओं से कितना संतुष्ट है।
इस तरह मरीज की आवाज सीधे स्वास्थ्य महकमे तक पहुंचेगी। किसी अस्पताल में बार-बार एक जैसी शिकायतें सामने आने पर संबंधित मामले की निगरानी, ऑडिट और कार्रवाई का रास्ता भी आसान होगा।

AI छांटेगा शिकायतें, सिस्टम तक पहुंचेगा ‘एक्शन वाला’ डेटा

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के मुताबिक बड़ी संख्या में मरीजों से मिलने वाले फीडबैक को एआई आधारित तकनीक के माध्यम से व्यवस्थित और विश्लेषित किया जाएगा। उपचार न मिलने, अनधिकृत शुल्क वसूली, खराब व्यवहार या अन्य गंभीर समस्या से जुड़े मामलों की पहचान कर उन्हें संबंधित संचालन टीमों तक पहुंचाया जा सकेगा।

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फिलहाल सीमित संख्या में मरीजों से मैनुअल कॉल के जरिए फीडबैक लिया जाता है, जिसमें समय और मानव संसाधन अधिक लगता है। एआई वाइस बॉट के जरिए बड़ी संख्या में मरीजों तक पहुंचने की तैयारी है। इससे कम समय में अधिक फीडबैक जुटेगा और अस्पतालों की वास्तविक स्थिति का बड़ा डेटा तैयार होगा।

अब आंकड़ों के साथ मरीज की आवाज भी बनेगी निगरानी का पैमाना

इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल कागजी आंकड़ों और अस्पतालों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी। मरीज का वास्तविक अनुभव भी व्यवस्था का हिस्सा बनेगा। साचीज का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान लाभार्थियों को सिर्फ उपचार ही नहीं, बल्कि सही, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले।

एआई से मिलने वाला फीडबैक अस्पतालों की कमियां पकड़ने के साथ-साथ शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यानी अब अस्पताल में आयुष्मान मरीज के साथ क्या हुआ, इसकी कहानी सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहेगी। AI के जरिए उसकी आवाज सीधे सिस्टम तक पहुंचेगी।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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