आजमगढ़ 3 अप्रैल 2026:
आजमगढ़ अपनी पुरानी पहचान के साथ अब नए अंदाज में सामने आ रहा है। यहां के निज़ामाबाद इलाके की ‘ब्लैक पॉटरी’ कला ने देश से बाहर भी अपनी मजबूत जगह बना ली है। काली मिट्टी से तैयार होने वाली यह कारीगरी अपने डिजाइन और चमक के कारण अलग पहचान रखती है।
निज़ामाबाद में 200 से ज्यादा कारीगर इस काम से जुड़े हैं। ये लोग फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान और सजावटी सामान बनाते हैं। इन चीजों की मांग अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही, विदेशों से भी ऑर्डर आने लगे हैं। वजह है इनका अलग लुक और उपयोगी होना।
यह शिल्प आजमगढ़ की पहचान के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आमदनी का भी बड़ा जरिया बन चुका है। खेती के साथ यह काम जिले की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है। खास बात यह है कि यहां की पॉटरी पर की गई नक्काशी और गहरा काला रंग लोगों को आकर्षित करता है।
कुम्हार समुदाय इस कला को पीढ़ियों से संभाले हुए है। इनके बनाए मिट्टी के बर्तन और देवी-देवताओं की मूर्तियां जैसे गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती त्योहारों और मेलों में खूब बिकती हैं। इन चीजों में परंपरा और हुनर दोनों साफ नजर आते हैं। ब्लैक पॉटरी को तैयार करने का तरीका भी अलग है। पहले बर्तन को खास तरह की मिट्टी और वनस्पति के घोल में डुबोया जाता है। इसके बाद उसे खास तरीके से पकाया जाता है, जिससे उसका रंग गहरा काला हो जाता है और उस पर चमक आती है।
पिछले कुछ समय में इस काम को नई रफ्तार मिली है। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत कारीगरों को ट्रेनिंग, आर्थिक मदद और बाजार तक पहुंच मिली है। इससे उनका काम आसान हुआ है और कमाई भी बढ़ी है। निज़ामाबाद के ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन से जुड़े संजय कुमार यादव बताते हैं कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर मिलने के बाद बड़ा फर्क पड़ा है। अब आधुनिक मशीनों की मदद से काम तेजी से होता है और बड़े ऑर्डर समय पर पूरे हो रहे हैं।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर में कच्चे माल से लेकर मशीन तक सब एक ही जगह मिल जाता है। कारीगर वहीं पर सामान तैयार करते हैं, पैक करते हैं और बाजार में बेचते हैं। इस सुविधा से उनका काम पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है और कारोबार भी बढ़ा है।






