बिजनेस डेस्क, 9 जनवरी 2026:
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ की शुरुआत के साथ ही निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भारत कोकिंग कोल का 1,071.11 करोड़ रुपये का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आज खुलते ही बाजार में छा गया। यह वर्ष 2026 का पहला मेनबोर्ड आईपीओ है, जिसे निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। आईपीओ खुलने के महज 25 मिनट के भीतर ही पूरा सब्सक्राइब हो गया, जिससे रिटेल और नॉन इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का भरोसा साफ तौर पर झलकता है।
सब्सक्रिप्शन में रिटेल और एनआईआई आगे
एनएसई और बीएसई के आंकड़ों के अनुसार आज दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक यह इश्यू कुल 3.39 गुना भर चुका था। रिटेल निवेशकों के लिए तय हिस्से में 4.58 गुना से अधिक आवेदन मिले, जबकि नॉन इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की श्रेणी में सबसे ज्यादा 5.46 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। हालांकि शुरुआती समय में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स की भागीदारी कम रही और यह हिस्सा केवल 2 प्रतिशत ही भरा। More:- IPO News
प्राइस बैंड और ऑफर फॉर सेल की पूरी तस्वीर
इस आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है, जिसमें प्रमोटर कोल इंडिया ने 46.57 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने की पेशकश की है। चूंकि इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया गया है, इसलिए कंपनी को इस आईपीओ से कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी और पूरी रकम कोल इंडिया को जाएगी।
एंकर निवेशकों ने पहले ही जताया भरोसा
आईपीओ खुलने से एक दिन पहले, 8 जनवरी को भारत कोकिंग कोल ने एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस दौरान 23 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 11.87 करोड़ शेयर अलॉट किए गए। एंकर निवेशकों में एलआईसी सबसे बड़ा निवेशक रहा, जबकि निप्पॉन लाइफ इंडिया म्यूचुअल फंड और बंधन म्यूचुअल फंड ने भी इस इश्यू में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी ली।
क्या है जीएमपी और विशेषज्ञों की राय?
बाजार जानकारों के अनुसार, भारत कोकिंग कोल के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम इस समय करीब 9.25 रुपये यानी लगभग 40 प्रतिशत चल रहा है। यदि ऊपरी प्राइस बैंड 23 रुपये के हिसाब से देखा जाए, तो शेयर की अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब 32.25 रुपये हो सकती है, जिससे निवेशकों को लगभग 40.22 प्रतिशत का संभावित लाभ मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जीएमपी केवल बाजार की धारणा को दर्शाता है। लेमन मार्केट्स के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, यह आईपीओ कोल इंडिया की वैल्यू अनलॉकिंग रणनीति का अहम हिस्सा है, जिससे आने वाले वर्षों में पैरेंट और सब्सिडियरी दोनों के शेयरधारकों को फायदा मिल सकता है।






