Uttar Pradesh

सपा के PDA को मजबूत करेंगे बड़े मुस्लिम चेहरे, अखिलेश की साइकिल पर सवार होंगे पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन!

जल्द ही समाजवादी कुनबे में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू के शामिल होने की चर्चा, अपना दल (एस) के एक पूर्व पदाधिकारी भी थाम सकते हैं दामन

लखनऊ, 13 फरवरी 2026:

यूपी की सियासत में चुनावी सरगर्मियां तेज हो रही हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपनी पीडीए रणनीति को धार देने में जुटे हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि 15 फरवरी को सपा को कई बड़े मुस्लिम चेहरे मिलने वाले हैं। इस कड़ी में बसपा के पूर्व कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू के नाम सबसे आगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद औपचारिक रूप से सपा का दामन थाम सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनके आने से सपा को पिछड़ा-मुस्लिम-दलित गठजोड़ को नए सिरे से धार देने में मदद मिल सकती है। कभी बसपा सरकार में मायावती के बाद सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार रहे नसीमुद्दीन का सियासी अनुभव सपा के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

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उधर, बसपा सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे अनीस अहमद उर्फ ‘फूल बाबू’ की एंट्री भी लगभग तय मानी जा रही है। पीलीभीत, बरेली और तराई बेल्ट में उनका अच्छा-खासा प्रभाव रहा है। हाल में उनकी अखिलेश यादव से हुई मुलाकात के बाद से ही उनके पाला बदलने की चर्चाएं तेज थीं। माना जा रहा है कि 15 फरवरी को उन्हें विधिवत सपा की सदस्यता दिलाई जाएगी, जिससे तराई क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने में पार्टी को बढ़त मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक इस जॉइनिंग कार्यक्रम में सिर्फ यही दो चेहरे नहीं होंगे। कई पूर्व विधायक और विपक्षी दलों के नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं। सबसे चौंकाने वाली चर्चा यह है कि अपना दल (एस) के एक पूर्व अध्यक्ष भी मंच साझा कर सकते हैं। इसे अनुप्रिया पटेल के वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

सियासी संकेत साफ हैं कि अखिलेश यादव छोटे दलों और क्षेत्रीय क्षत्रपों को जोड़कर 2027 से पहले अपने परंपरागत ‘माई’ (मुस्लिम-यादव) आधार को और व्यापक बनाना चाहते हैं। एक के बाद एक प्रभावशाली चेहरों की ‘साइकिल’ पर सवारी सपा को चुनावी मैदान में नई रफ्तार दे सकती है।

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