
न्यूज डेस्क, 13 सितंबर 2026:
भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर अपने रुख को स्पष्ट अंदाज में रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। ग्लोबल साउथ की सामूहिक ताकत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में BRICS देशों को ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाते हुए वैश्विक दक्षिण की एकजुटता मजबूत करनी चाहिए।
शी का संदेश अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक देश के प्रभुत्व के खिलाफ साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के नियम सभी देशों की भागीदारी से बनने चाहिए और ‘ताकतवर ही सही है’ की सोच को बहुत पहले पीछे छोड़ देना चाहिए था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को वैश्विक संबंधों का आधार बताया।
‘नियमों के बिना दुनिया ट्रैफिक सिग्नल के बिना चौराहे जैसी’
शी ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की तुलना ट्रैफिक सिग्नल के बिना चौराहे से करते हुए कहा कि नियमों के अभाव में अराजकता और अफरा-तफरी तय है। उनका जोर था कि अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक देश की पसंद के मुताबिक नहीं अपितु सभी देशों की भागीदारी से तय होने चाहिए। उन्होंने दोहरे मानदंडों का विरोध करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
चीन ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका मजबूत करने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विश्व व्यापार संगठन को प्रभावी बनाने की भी वकालत की। शी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज और भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई। इसके साथ ही उन्होंने नव विकास बैंक के विस्तार और प्रभावी संचालन का समर्थन किया।
विकास के केंद्र में जनता, चीन की परियोजनाओं का हवाला
शी ने ग्लोबल साउथ से जन-केंद्रित विकास को प्राथमिकता देने और 2030 सतत विकास एजेंडा के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने चीन की ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव का हवाला देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में चीन ने दूसरे देशों के साथ मिलकर 2,000 से अधिक परियोजनाएं लागू की हैं। दो लाख से ज्यादा पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया है। उनके अनुसार इन प्रयासों से 120 से ज्यादा देशों के लोगों को लाभ मिला है। अफ्रीका पर चीन के बढ़ते फोकस को रेखांकित करते हुए शी ने कहा कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले सभी 53 अफ्रीकी देशों को शून्य शुल्क की सुविधा दी गई है।
With leaders of BRICS Member and Partner Countries, Outreach Invitees and Heads of International Organisations together at BRICS Summit in New Delhi.
A powerful reflection of the growing strength and global resonance of the BRICS family.
We are connected by a shared vision of… pic.twitter.com/TdsHEbx0yA
— Narendra Modi (@narendramodi) September 13, 2026
AI पर चीन की पहल, BRICS के लिए पांच प्रस्ताव
शी ने BRICS सहयोग को नई तकनीकी और आर्थिक दिशा देने के लिए पांच प्रमुख पहलें प्रस्तावित कीं। इनमें AI, व्यापार एवं निवेश, डिजिटल उद्योग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभा विकास शामिल हैं। चीन ने BRICS देशों के लिए ओपन सोर्स AI समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने की पेशकश की। बड़े भाषा मॉडल के विकास और उपयोग में सहयोग, AI प्रशिक्षण और एक खुले AI इकोसिस्टम का प्रस्ताव रखा गया।

व्यापार के मोर्चे पर चीन ने BRICS देशों के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी का सुझाव दिया। डिजिटल क्षेत्र में साझा डिजिटल इकोसिस्टम और क्लाउड प्लेटफॉर्म और विनिर्माण क्षेत्र में स्मार्ट फैक्ट्रियों के विकास में सहयोग की बात कही गई।
तकनीकी प्रतिभा के लिए शी ने BRICS इंजीनियर विकास गठबंधन बनाने और इंजीनियरों की योग्यता से जुड़े मानकों की पारस्परिक मान्यता बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। चीन BRICS युवा वैज्ञानिक-तकनीकी आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू करेगा।
जलवायु से लेकर AI तक, चीन ने रखा वैश्विक एजेंडा
शी ने जलवायु परिवर्तन के मूल कारणों से निपटने, वैश्विक जलवायु व्यवस्था मजबूत करने और पेरिस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। AI को लेकर उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए होना चाहिए और ऐसी वैश्विक AI व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जिस पर व्यापक सहमति हो।
अपने संबोधन में शी ने चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे चीन के विकास के साथ-साथ दूसरे देशों के लिए सहयोग के नए अवसरों का माध्यम बताया और ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव तथा बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। BRICS मंच से चीन ने एक साथ वैश्विक व्यवस्था, ग्लोबल साउथ, तकनीक, व्यापार और विकास पर अपना विस्तृत एजेंडा सामने रखा।






