लखनऊ/अयोध्या, 28 जनवरी 2026:
यूपी के अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में दिया गया इस्तीफा अब एक नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है। इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद उनके ही सगे भाई विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप सामने आए हैं। उनमें कहा गया है कि प्रशांत कुमार सिंह को दिव्यांग कोटे में नौकरी फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर मिली थी। इस मामले की जांच पिछले चार वर्षों से लंबित बताई जा रही है।
48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार दोपहर अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा था कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणी से वे आहत हैं और जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए। उनका कहना था कि वे उसी सरकार से वेतन लेते हैं और उसी नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को चुपचाप सहन नहीं कर सकते।

इस्तीफे के बाद प्रशांत कुमार सिंह पत्नी से फोन पर बात करते हुए भावुक हो गए। बातचीत के दौरान वे रो पड़े। उन्होंने पत्नी से कहा कि वे पिछले दो दिनों से सो नहीं पाए और मन बेहद व्यथित था। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी दो छोटी बेटियां यह देखें कि उनका पिता सही और गलत के बीच खड़े होने से नहीं डरा। उनके अनुसार यह फैसला किसी आवेग में नहीं बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया।
इस बीच मंगलवार शाम सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उनके कार्यालय पहुंचे और उनसे काफी देर तक बातचीत की। इसी बीच उनके बड़े भाई विश्वजीत सिंह का आरोप सामने आया कि उन्होंने वर्ष 2021 में प्रशांत के कथित फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की थी जो अब तक लंबित है। इस संबंध में सीएमओ मऊ की ओर से महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश और स्टेट मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र भी भेजा गया था। पत्र में प्रशांत कुमार सिंह के साथ उनकी बहन जया सिंह के नाम का भी उल्लेख है।
मालूम हो कि प्रशांत कुमार सिंह आजमगढ़ से एलएलबी करने के बाद छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। एक समय दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के करीबी भी बताए जाते हैं। वे उत्तर प्रदेश जीएसटी संगठन के चुनाव में भी भाग्य आजमा चुके हैं। उनके पिता त्रिपुरारी सिंह आजमगढ़ बिजली विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। पत्नी वीणा सिंह पहले मुंबई एयरपोर्ट पर स्पोर्ट्स कोटे से दरोगा के पद पर तैनात थीं। उन्होंने पांच साल पहले इस्तीफा दे दिया था। परिवार लखनऊ में रहता है।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था, जिसे शासन ने नामंजूर कर उन्हें निलंबित कर दिया। अब प्रशांत कुमार सिंह का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी चर्चा का विषय बना हुआ है।






