Uttarakhand

चार दिन से दहक रहे चमोली के जंगल…खतरे में वन्यजीव, धुआं घोट रहा दम

20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित, वन विभाग, पुलिस और फायर टीम आग पर काबू पाने में जुटीं, हाईवे पर पेड़ पत्थर गिरने से यातायात प्रभावित

योगेंद्र मलिक

चमोली, 7 मार्च 2026:

उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले चार दिनों से जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। नंदप्रयाग, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, सिमली, गैरसैंण और थराली विकासखंडों के कई वन क्षेत्र आग की चपेट में हैं। इससे आसपास के इलाकों में घना धुआं फैल गया है, जिससे लोगों को आंखों में जलन और गले से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आग के कारण वन्यजीवों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। अब तक करीब 20 हेक्टेयर से अधिक वनक्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बद्रीनाथ वन प्रभाग की मध्य पिंडर रेंज के चेपड़ों, सौगांव, खाड़ीबगड़, जूनिधार और गोठिंडा क्षेत्रों में आग फैल गई है। चेपड़ों गांव की कुछ गौशालाएं भी इसकी चपेट में आ गईं, जिससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। आग की लपटें जूनिधार गांव के पास तक पहुंच गई हैं।

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थराली क्षेत्र के जंगलों में भी आग से नुकसान की खबर है। वहीं भारत-चीन सीमा से सटे मलारी गांव के ऊपरी हिस्से में भुजगढ़ नाले के पास नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन में भी आग फैल गई। इसके अलावा नारायणबगड़ क्षेत्र के नोपानी-झंगोर गाड़, जाख-कड़ाकोट, बेड़गांव, मानूर, तलासेरा और टेंटुड़ा के जंगल भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।

वन रेंजर गौरव नेगी के अनुसार मलारी क्षेत्र में सुराईथोटा की टीम वन दरोगा कुलदीप नेगी के नेतृत्व में आग बुझाने का काम कर रही है। एक हिस्से में आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में प्रयास जारी हैं। टीमें फायर लाइन बनाकर झाड़ियों और घास में फैल रही आग को रोकने की कोशिश कर रही हैं। सेना के शिविर के आसपास भी निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल वह सुरक्षित है।

कर्णप्रयाग और नारायणबगड़ क्षेत्रों में फायर वाचर और वन अधिकारी लगातार आग बुझाने में लगे हैं। पुलिस और अग्निशमन दल भी सहयोग कर रहे हैं। हालांकि घने चीड़ के जंगल, खड़ी चट्टानें और दुर्गम पहाड़ी इलाका आग बुझाने के काम को कठिन बना रहे हैं। नंदप्रयाग, आदिबदरी और सिमली के कपीरीपट्टी क्षेत्र में जैव विविधता को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं थराली-देवाल हाईवे पर कुछ स्थानों पर पेड़ और पत्थर गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है। वन विभाग ने जल्द स्थिति पर नियंत्रण पाने का भरोसा जताया है।

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