चारधाम व पंचकेदार में शीतकालीन प्रवास की तैयारियां तेज, कपाट बंद होने की तिथियां घोषित
विजयदशमी पर मंदिर समितियों ने शुभ मुहूर्त की दी जानकारी, छह तारीख से शुरू होने वाला कपाट बंदी का सिलसिला 16 नवंबर तक चलेगा, श्रद्धालुओं के लिए बंद नहीं होंगे आस्था के द्वार

राजकिशोर तिवारी
रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशी, 20 अक्टूबर 2026ः
हिमालय की ऊंची चोटियों पर सर्दियों एवं बर्फवारी की दस्तक के साथ ही उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम और पंचकेदार में शीतकालीन प्रवास की तैयारियां तेज हो गई हैं। विजयदशमी और नवरात्र के अवसर पर मंदिर समितियों ने प्रमुख धामों के कपाट बंद होने की तिथियां और शुभ मुहूर्त घोषित कर दिए हैं। नवंबर में छह तारीख से शुरू होने वाला कपाट बंदी का सिलसिला 16 नवंबर तक चलेगा। इसके साथ ही ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में नियमित दर्शन और पूजा-अर्चना पर विराम लग जाएगा और देवी-देवताओं की उत्सव डोलियां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए रवाना होंगी।
इस वर्ष कपाट बंद होने की घोषित तिथियों में सबसे पहले 6 नवंबर को तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होंगे। इसके बाद 10 नवंबर को गंगोत्री धाम और 11 नवंबर को केदारनाथ एवं यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। वहीं, द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। कपाट बंद होने की इन तिथियों के साथ ही चारधाम यात्रा के समापन और शीतकालीन पूजा व्यवस्था को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं। हालांकि श्रद्धालुओं के लिए आस्था के द्वार बंद नहीं होंगे। ऊखीमठ, मक्कूमठ, मुखबा और खरसाली में शीतकाल के दौरान भी आराध्य के दर्शन और पूजा-अर्चना जारी रहेगी।
केदारनाथ में इस दिन बंद होंगे कपाट
केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। यही मंदिर शीतकाल में बाबा केदार की पूजा-अर्चना का प्रमुख केंद्र रहेगा। डोली प्रभारी डीएस भुजवाण के अनुसार निर्धारित परंपराओं के अनुरूप कपाट बंद होने की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।
तुंगनाथ व मदमहेश्वर में भी बदलेगा पूजा का स्थान
पंचकेदार में शामिल तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु शीतकाल में दर्शन कर सकेंगे। वहीं, द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होने के बाद उत्सव डोली की यात्रा शुरू होगी। 17 नवंबर को गौंडार से रांसी, 18 नवंबर को रांसी से गिरिया और 19 नवंबर को गिरिया से ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचने का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
गंगोत्री व यमुनोत्री में बंद होंगे कपाट
उत्तरकाशी जिले के दोनों प्रमुख धामों में भी कपाट बंद होने की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा के अवसर पर दोपहर 12:05 बजे अभिजीत मुहूर्त में बंद होंगे। इसके बाद मां गंगा की उत्सव डोली सेना के बैंड, श्रद्धालुओं और जयकारों के बीच शीतकालीन प्रवास मुखबा के लिए रवाना होगी। 11 नवंबर को भैया दूज पर डोली मुखबा पहुंचेगी, जहां अगले छह माह तक मां गंगा की पूजा-अर्चना होगी। इसी तरह यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज पर सुबह 10:28 बजे बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की पूजा उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में होगी। मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों ने विजयदशमी के अवसर पर परंपरानुसार कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया है।

आस्था का सिलसिला रहेगा जारी
चारधाम और पंचकेदार के कपाट बंद होने का अर्थ धार्मिक गतिविधियों का पूर्ण विराम नहीं, बल्कि पूजा व्यवस्था का हिमालय की ऊंचाइयों से शीतकालीन प्रवास स्थलों की ओर स्थानांतरण है। बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के बीच श्रद्धालु इन निर्धारित स्थलों पर अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे। ऐसे में नवंबर का महीना उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं, उत्सव डोलियों की यात्राओं और शीतकालीन तीर्थाटन के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।






