लखनऊ, 23 जनवरी 2026:
राजधानी स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। खास मेहमान सीएम योगी आदित्यनाथ ने आपातकालीन स्थिति से बचाव एवं जागरूकता हेतु विभिन्न दलों के साहसिक प्रदर्शन देखे और उनकी सराहना की।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती ‘पराक्रम दिवस’ पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से किया गया। इस अभ्यास का मकसद आपात स्थिति, हवाई हमले और आपदा के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों को परखना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कार्य के लिए सरकार पर निर्भरता किसी भी स्वावलंबी समाज का गुण नहीं हो सकता। स्वावलंबन की पहली शर्त यह है कि हम अपने देश और समाज के प्रति भी सोचें और उस सोच को आगे बढ़ाएं, जो सरकार के साथ मिलकर उसकी गति को कई गुना बढ़ा देती है। इस तरह की मॉक ड्रिल से आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होती है। मॉक ड्रिल हमें सम विषम परिस्थिति में तैयार रहने के लिए प्रेरित करता है। आज प्रदेश में वर्तमान में 45,000 होमगार्ड की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। एसडीआरएफ के माध्यम से ‘आपदा मित्रों’ की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। आपदा मित्र के रूप में कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को उत्तर प्रदेश में होमगार्ड की भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी।

सीएम ने कहा युद्धकाल हो या शांतिकाल, आपदा हो या कहीं कोई आकस्मिक दुर्घटना ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में नागरिक सुरक्षा संगठन की भूमिका को लोगों ने निर्विवाद रूप से स्वीकार किया है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नागरिक सुरक्षा संगठन का गठन किया गया है। नागरिक सुरक्षा संगठन सिर्फ पर्व त्योहार नहीं बल्कि युद्ध व बड़े आयोजनों में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत की नारी शक्ति की सामर्थ्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी ने रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड का गठन किया और उस समय देश को इस सामर्थ्य से अवगत कराया।
मॉक ड्रिल एक बहुमंजिला इमारत व ढाबे के आसपास केंद्रित रही। पहले नागरिक सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से हवाई हमले की सूचना मिलने पर लाल सायरन गूंजा। सायरन बजते ही नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों ने लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचाया और बम से बचाव के तरीकों का अभ्यास कराया। हवाई हमले की समाप्ति का संकेत देते हुए हरा सायरन बजाया गया। इसके बाद घटना नियंत्रण अधिकारी ने मौके का निरीक्षण कर क्षति की जानकारी नियंत्रण कक्ष को दी।
मॉक ड्रिल के दौरान आग लगने की स्थिति से निपटने का भी अभ्यास किया गया। स्वयंसेवकों ने फायर एक्सटिंग्विशर और कंबल की मदद से छोटी आग पर काबू पाया। गैस सिलेंडर में लगी आग को भी बाल्टी और कंबल के जरिए बुझाया गया। इसके बाद मकान की पहली मंजिल पर फंसे व्यक्ति को जाल के सहारे सुरक्षित नीचे उतार कर रेस्क्यू किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौके पर मेडिकल पोस्ट स्थापित की गई, जहां घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया और उन्हें सुरक्षित तरीके से मेडिकल पोस्ट तक पहुंचाया गया। मकान में लगी बड़ी आग से एक व्यक्ति को फायर सूट पहनकर बाहर निकाला गया, जिसके बाद अग्निशमन विभाग के फायर टेंडर ने आग पर काबू पाया।

SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और अपनी पोस्ट स्थापित की। SDRF ने ऊंची इमारत में फंसे लोगों का रेस्क्यू किया, जबकि NDRF और SDRF की संयुक्त टीम ने गंभीर रूप से घायलों का उपचार और बचाव किया। NDRF की ओर से केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर प्रभाव से जुड़ी स्थिति की जांच और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी दिखाई गई। नुकसान की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मॉक ड्रिल की समाप्ति की घोषणा की गई।
कार्यक्रम में नागरिक सुरक्षा मंत्री धर्मवीर प्रजापति, सलाहकार अवनीश अवस्थी, डीजीपी राजीव कृष्णा, चीफ वार्डेन अमरनाथ मिश्रा,विधायक नीरज वोरा, अन्य आला अफसर डीएम व एसएसपी आदि मौजूद रहे।






