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अखिलेश के वोट कटवाने के आरोपों पर आयोग का पलटवार : बिना फॉर्म-7 व सत्यापन किसी का नाम नहीं कटता

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष के आरोपों को सिरे से किया खारिज, कहा कि सकलडीहा के विधायक की पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा गया

लखनऊ, 17 फरवरी 2026:

यूपी में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के बीच वोटर लिस्ट से नाम काटने को लेकर सियासी संग्राम छिड़ा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार भाजपा और भारत निर्वाचन आयोग पर निशाना साध रहे हैं। इस बीच मंगलवार को यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सकलडीहा के विधायक की पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा गया है।

उन्होंने कहा कि बलिया के सिकंदरपुर में 126 और प्रतापगढ़ के बाबागंज में 100 वोटरों के नाम कटने के आरोपों की जांच में भी कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक किसी का नाम हटाने के लिए आपत्ति फॉर्म-7 में नाम, वोटर आईडी नंबर और ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य है। आवेदनकर्ता का उसी विधानसभा क्षेत्र का निवासी होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कोई अज्ञात व्यक्ति किसी दूसरे का नाम नहीं कटवा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना सत्यापन के किसी का नाम हटाया नहीं जाता। इससे पहले सोमवार को सपा मुख्यालय में अखिलेश यादव ने एसआईआर के जरिए पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वोटरों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि भाजपा फर्जी हस्ताक्षरों से फॉर्म-7 भरवाकर सपा समर्थक वोट कटवा रही है।

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अखिलेश ने कहा कि लोकसभा में जहां सपा जीती है वहां वोट कटवाने की रणनीति बनाई गई। उन्होंने बताया कि पार्टी के बीएलए तक के नाम कटवाए गए हैं। औरैया की विधुना सीट पर एक निरक्षर मतदाता के अंगूठे की जगह फर्जी हस्ताक्षर से फॉर्म भरकर वोट कटवाने का आरोप लगाया गया। अयोध्या समेत कई जिलों में भी ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई।

अखिलेश के अनुसार सपा ने जहां 47 फॉर्म-7 भरे, वहीं भाजपा की ओर से 1097 से अधिक और कथित तौर पर अज्ञात लोगों द्वारा 1.28 लाख से ज्यादा फॉर्म भरे गए। सपा विधायकों का प्रतिनिधिमंडल आयोग को ज्ञापन देगा और सदन में भी मुद्दा उठाएगा। सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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