लखनऊ, 26 नवंबर 2025 :
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुख्यालय शक्ति भवन के बाहर बिजली संविदा कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सड़क पर कारपेट बिछाकर पूरा रास्ता बंद कर दिया। इसके कारण आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। और प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारे भी लगाए। उनका आरोप है कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।
यह धरना उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले हुआ। संविदा कर्मचारियों का कहना है कि कॉरपोरेशन प्रबंधन अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर रहा। संघ का आरोप है कि 2024-25 में आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की गई और हटाए गए कर्मियों को वापस नहीं लिया जा रहा। वर्टिकल व्यवस्था लागू करना, मानक समिति की रिपोर्ट न जारी करना और अन्य मांगों की अनदेखी भी गुस्से की वजह बनी। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि प्रबंधन से कई बार बातचीत हुई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला लेकिन समाधान नहीं।
कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री देवेंद्र पांडेय ने बताया कि निगम को बार-बार कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों की वापसी, 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन, घायल कर्मियों को कैशलेस इलाज, ईपीएफ घोटाले की जांच और स्मार्ट मीटर के बाद मीटर रीडरों के समायोजन जैसी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी है।
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले संघ और विद्युत निगम प्रबंधन के बीच निदेशक स्तर की बैठक भी हुई थी। इसमें वर्ष 2017 के आदेश के आधार पर 2024–25 में हटाए गए करीब 25,000 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को वापस लेने की मांग उठाई गई। इसके अलावा 55 वर्ष की उम्र का हवाला देकर हटाए गए कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने और सभी कर्मियों को 60 वर्ष तक नौकरी देने की मांग भी रखी गई। हालांकि बैठक में आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
निविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद ने कहा कि, UPPCl कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा, इसलिए मजबूर होकर सभी प्रदेशभर के संविदाकर्मी लखनऊ में इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर प्रबंधन मांगें मान लेता है तो आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन समाधान न मिलने पर यह विरोध और तेज किया जाएगा।






