लखनऊ, 19 फरवरी 2026:
यूपी में शंकराचार्य विवाद और ब्राह्मण समाज की कथित नाराजगी के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 ब्राह्मण बटुकों की पूजा कराई। उन्होंने सभी बटुकों का तिलक किया, चरण स्पर्श कर प्रणाम किया और फूल बरसाए। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार भी हुआ। राजनीतिक गलियारों में इसे ब्राह्मण समाज को संदेश देने और बिगड़ी छवि सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
विवाद की जड़ 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज माघ मेले में हुई घटना है। उस दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने पालकी रोककर पैदल जाने को कहा। शिष्यों ने विरोध किया तो धक्का-मुक्की हुई। आरोप है कि एक शिष्य को चोटी पकड़कर घसीटा गया और चौकी में पिटाई भी हुई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। शंकराचार्य नाराज होकर शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए और 28 जनवरी तक स्नान नहीं किया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक करीब एक महीने तक चुप रहे। दो दिन पूर्व उन्होंने बयान दिया कि चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने शंकराचार्य का नाम नहीं लिया। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में बयान देकर संतों के सम्मान की बात कही लेकिन शंकराचार्य से मुलाकात नहीं की।
सूत्रों के मुताबिक पाठक ने यह आयोजन केंद्रीय नेतृत्व को विश्वास में लेकर किया। यूजीसी और अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर ब्राह्मण समाज की नाराजगी के बीच भाजपा के ब्राह्मण नेता माने जाने वाले पाठक पर दबाव बढ़ा था। ऐसे में 101 बटुकों की पूजा को सियासी ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर देखा जा रहा है।






