Uttar Pradesh

विकास भी, वन्यजीव सुरक्षा भी : संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनाओं पर योगी सरकार की सख्त गाइडलाइन

राज्य वन्यजीव परिषद की बैठक में विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्य वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय संतुलन के साथ कराएं

लखनऊ, 10 फरवरी 2026:

यूपी में विकास कार्य अब केवल रफ्तार से नहीं बल्कि जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ेंगे। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों और इको-सेंसिटिव जोन में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव और विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास की हर योजना में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन और आवासीय निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों से जुड़े सभी प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव भेजते समय संबंधित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेंट, वैकल्पिक मार्गों और आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।

बैठक में विभिन्न जनपदों के वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े 12 नए प्रस्तावों पर सहमति दी गई। इनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पंप एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर प्रणाली, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल और संपर्क मार्ग निर्माण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। ये प्रस्ताव इटावा, गोंडा, पीलीभीत, बरेली और बांदा समेत कई जिलों से जुड़े हैं।

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वृक्ष कटाई को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्ष कटान हो और जहां संभव हो, ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर और इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने कुछ वेटलैंड्स में सिल्ट जमा होने पर चिंता जताते हुए तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अभियान के तहत कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।

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