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आस्था से संवरा पर्यावरण…बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से मिली थी पहचान, मंदिर में चढ़ी हर चीज का हुआ इस्तेमाल, फूल से खाद, प्लास्टिक से फाइबर और दूध तक का हुआ सही उपयोग, गांव की तस्वीर बदली

लखनऊ/बागपत, 27 मार्च 2026:

बागपत जिले का पुरा महादेव मंदिर अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्था का भी उदाहरण बनकर सामने आया है। बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 के रूप में पहचान बनाने के बाद महाशिवरात्रि के मौके पर यहां जीरो वेस्ट सिस्टम लागू किया गया, जिसमें मंदिर में चढ़ने वाली हर चीज को बेकार होने से बचाकर उसका इस्तेमाल किया गया।

परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में इस बार खास तैयारी की गई थी। श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए फूल, दूध, प्लास्टिक बोतलें, पूजा के धागे और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों तक को अलग-अलग इकट्ठा किया गया। बाद में इन्हें प्रोसेस कर दोबारा इस्तेमाल में लाया गया।

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आंकड़ों पर नजर डालें तो 450 किलो से ज्यादा फूलों को प्रोसेस किया गया। करीब एक टन जैविक कचरे से खाद तैयार हुई। 700 किलो प्लास्टिक बोतलों को फाइबर फिल में बदला गया। 3000 से ज्यादा पूजा धागों का दोबारा इस्तेमाल हुआ। 2500 के आसपास चप्पलों को मैट और दूसरे काम में लिया गया। मंदिर में अभिषेक में इस्तेमाल हुआ 4563 लीटर दूध भी बर्बाद नहीं हुआ, उसे पशुओं की देखभाल में इस्तेमाल किया गया।

इस पूरी व्यवस्था में स्थानीय लोगों की अहम भूमिका रही। खासकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गांव के लोगों के साथ मिलकर यह काम किया गया, जिससे रोजगार के मौके भी बने।

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जिला प्रशासन के मुताबिक, इस मॉडल में दो बातों पर सबसे ज्यादा जोर रहा। पहला, मंदिर में चढ़ने वाली चीजों को इकट्ठा कर सही जगह तक पहुंचाना। दूसरा, उन्हें दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाना। इससे न सिर्फ गंदगी कम हुई बल्कि आसपास का माहौल भी साफ-सुथरा रहा।

इस पहल का असर श्रद्धालुओं पर भी दिखा। मंदिर परिसर में साफ-सफाई देखकर लोगों का व्यवहार भी बदला और उन्होंने कचरा इधर-उधर फेंकने से परहेज किया। स्वयंसेवकों ने इसे सेवा और जागरूकता से जुड़ा काम बताया।

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पर्यटन विभाग ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे दूसरे धार्मिक स्थलों पर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। डीएम बागपत अस्मिता लाल का कहना है कि आने वाले समय में इसी तरह के मॉडल को और जगहों पर अपनाया जाएगा, ताकि आस्था के साथ साफ-सफाई का संतुलन बना रहे।

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