Barabanki City

तलाक के बाद भी न छोड़ी ‘तलवार’…प्रैक्टिस के बीच महिला सिपाही ने दी जान, सुसाइड नोट में ये लिखा

बहराइच रोड पर शहर के नजदीक 10वीं वाहिनी पीएसी परिसर में हुई घटना, महिला हेड कांस्टेबल का शव सरकारी आवास में मिला, सुसाइड नोट में निजी परेशानियों का जिक्र, तलवारबाजी में कई पदक जीत चुकी थी इटावा की शिल्पी यादव, प्रैक्टिस के लिए मैदान नहीं पहुंचीं तो साथी खिलाड़ियों ने तोड़ा कमरे का दरवाजा

बाराबंकी, 13 मई 2026:

बहराइच रोड स्थित 10वीं वाहिनी पीएसी परिसर में तैनात महिला हेड कांस्टेबल शिल्पी यादव का शव मंगलवार शाम उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला। कमरे से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए निजी परेशानियों को वजह बताया है। शादी और तलाक के बाद भी तलवार न रखने वाली शिल्पी की खुदकुशी से उसका परिवार सदमे में है।

शिल्पी यादव की उम्र 32 वर्ष थी। कमिश्नरेट कानपुर में तैनात शिल्पी राष्ट्रीय स्तर की तलवारबाज भी थीं। पिछले दो महीनों से वह अपनी टीम के साथ 10वीं वाहिनी पीएसी परिसर में रहकर तलवारबाजी (फेंसिंग) का अभ्यास कर रही थीं। मंगलवार शाम तय समय पर जब वह प्रैक्टिस ग्राउंड नहीं पहुंचीं तो साथी खिलाड़ी उन्हें बुलाने सरकारी आवास पर पहुंचे। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारियों ने दरवाजा तोड़कर कमरे के भीतर प्रवेश किया।

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अंदर शिल्पी यादव का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलते ही पीएसी के अधिकारी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। कमरे की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट मिला। इसमें खुद को मानसिक तनाव में होने की बात कही।। साथ ही साफ लिखा है कि उनकी आत्महत्या के लिए उनके सहकर्मियों या परिजनों का कोई लेना-देना नहीं है और वह अपनी मौत की जिम्मेदार स्वयं है।

इटावा जिले के बसरेहर थाना क्षेत्र के पत्ता का पुरवा गांव निवासी किसान अनिल कुमार यादव की बेटी शिल्पी ने वर्ष 2016 में यूपी पुलिस में सिपाही पद पर नौकरी ज्वाइन की थी। इससे एक साल पहले 2015 में उनकी शादी ऊसराहार के एक गांव में रहने वाले युवक से हो गई। इधर, तीन साल पहले पति से उनका तलाक हो गया था। इस बीच शिल्पी ने अपने छोटे भाई ऋषि यादव को भी पुलिस सेवा में आने के लिए प्रेरित किया। हाल ही में अमेठी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 26 अप्रैल को ऋषि की पासिंग आउट परेड हुई थी।

शिल्पी ने तलवारबाजी प्रतियोगिताओं में यूपी पुलिस के लिए कई पदक जीते और विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई। शादी व तलाक के बाद भी परिवार और अपनी तलवारबाजी से जुड़ाव रखने वाली शिल्पी ने मौत से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में अपनी मुश्किलें साझा नहीं कीं। इटावा से आया उनका परिवार इसी बात को लेकर बिलख रहा था कि आखिर ऐसी क्या बात थी कि उनकी बहादुर बिटिया हौसला हार गई।

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