Lucknow City

जरबेरा की चमक से बदली किस्मत : बाराबंकी के युवा किसान नीरज पटेल ने रची सफलता की नई कहानी

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना ने कृषि सफर को दी नई दिशा, पॉलीहाउस लगाकर कर रहे जरबेरा की खेती, खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ नीरज पांच अन्य लोगों को भी दे रहे रोजगार

लखनऊ, 16 मार्च 2026:

यूपी सरकार की कृषि और कृषक हितैषी योजनाएं प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। सरकारी योजनाओं के सहयोग से किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल ने पेश की है। उन्होंने जरबेरा फूलों की खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ के तहत मिले लाभ नीरज पटेल के कृषि सफर को नई दिशा दी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। हालांकि उनके परिवार में पारंपरिक खेती ही की जाती थी लेकिन नीरज कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ वे उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे। वहां उन्हें जरबेरा फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली। यही जानकारी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई।

WhatsApp Image 2026-03-16 at 4.53.42 PM

इसके बाद नीरज ने आधुनिक तकनीक के साथ जरबेरा की खेती शुरू करने का फैसला किया। वर्ष 2018 में उन्हें राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 29 लाख 50 हजार रुपये का ऋण मिला। उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त हुई। सरकार की ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन’ योजना और संरक्षित खेती के तहत पॉलीहाउस तकनीक से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी योजना के तहत नीरज ने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया।

पॉलीहाउस लगाने में लगभग 70 से 75 लाख रुपये की लागत आई, लेकिन सरकारी ऋण और अनुदान की मदद से यह संभव हो पाया। आज उनके पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हैं। ये रोजाना उत्पादन देते हैं। एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह वर्षों तक लगातार फूल देते हैं।

नीरज के खेत में आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इससे पौधों को बूंद-बूंद पानी मिलता है। यह तकनीक इजरायली पद्धति पर आधारित है। इससे पानी की बचत के साथ उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।

जरबेरा फूलों की बाजार में भारी मांग रहती है। शादी-विवाह, सजावट और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इसी वजह से नीरज को अपने फूलों की बिक्री में भी कोई परेशानी नहीं होती। उन्होंने बताया कि साल भर में सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 8 से 10 लाख रुपये की शुद्ध आय हो जाती है।

आज नीरज पटेल खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने पॉलीहाउस में पांच अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनकी यह सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उन्हें आधुनिक फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button