लखनऊ, 4 मार्च 2026:
देश के अहम धार्मिक स्थानों वाले प्रदेश यूपी में आज होली के पर्व पर छाए उल्लास के आगे इंद्रधनुष के रंग भी फीके पड़ गए। चंद्रग्रहण सूतक काल के कारण दो दिन में होलिका दहन बंटा लेकिन रंग खेलने का सब्र बांध टूटकर बाहर आया और सराबोर कर गया। लखनऊ के गली कूचों के साथ खास इलाके होली के उत्सव में डूबे रहे। वहीं प्रभु राम की नगरी अयोध्या, कृष्ण जन्म भूमि मथुरा वृंदावन व शिवनगरी काशी में रंगों का महोत्सव दिखा।
चौक में रंगों के उत्सव में ऊंट पर बैठे बृजेश पाठक, दिनेश शर्मा व नीरज बोरा ने खेला रंग
नवाबों के शहर लखनऊ में सुबह से ही मोहल्लों में ढोलक और डीजे की आवाज गूंजने लगी। पुराने लखनऊ की गलियों में गुलाल की खुशबू फैली रही, जबकि गोमती नगर और इंदिरानगर जैसे नए इलाकों में युवाओं की टोलियां रंगों में सराबोर दिखीं। चौक चौराहे पर हुए होली उत्सव में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सदस्य डॉक्टर दिनेश शर्मा, विधायक नीरज बोरा, पार्षद अनुराग मिश्रा समेत अन्य लोग शामिल रहे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ऊंट पर बैठकर होली खेली।
यहां की पारंपरिक होली ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा। ऊंट पर सवार होकर निकले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर जमकर गुलाल उड़ाया। पूर्व डिप्टी सीएम व राज्य सभा सदस्य डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा खुली जिप्सी में पहुंचे। समर्थकों ने उन पर रंगों की बौछार कर दी। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को रंग लगाया और लोगों को होली की मुबारकबाद दी। माहौल में ठहाके, रंग और संगीत का समा बंधा रहा। नगर निगम की ओर से दोपहर तक पानी की सप्लाई की गई।

खाटू श्याम मंदिर में फूलों की होली, जयकारों से गूंजा गोमती तट
बीरबल साहनी मार्ग स्थित गोमती तट पर बने बाबा श्री खाटू श्याम मंदिर में फूलों की होली का आयोजन किया गया। बाबा श्याम के दरबार मे जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, मंदिर परिसर हारे का सहारा श्याम हमारा के जयकारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्याम भक्तों ने भक्ति गीतों पर झूमते हुए फूलों की वर्षा की। राज्य सभा सदस्य दिनेश शर्मा ने बाबा श्याम के दर्शन कर होली खेली। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया था। बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया गया। दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर बाबा का आशीर्वाद लिया और फिर सामूहिक रूप से पुष्प होली में शामिल हुए।
काशी में घाटों से गलियों तक रंगों की मस्ती, शिव बरात निकाली
शिवनगरी वाराणसी में होली का रंग और भी निराला रहा। अस्सी घाट पर ढोल मजीरा के साथ होली की मस्ती की। सुबह ही लोग मैदागिन से ढोल मजीरा बजाते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और अबीर-गुलाल खेलने के साथ बाबा को भजन और होली गीत सुनाई। गोदौलिया पर कपड़ा फाड़ होली का रंग दिखेगा दिया तो आईपी विजया पर युवा थिरकते मिले। चेतगंज, नमो घाट, अस्सी चौराहा, शिवाला, सोनारपुरा, जंगमबाड़ी, गोदौलिया, लक्सा, काली महाल, चेतगंज, लोहटिया, मैदागिन, विश्ववेश्वरगंज, मछोदरी, लंका चौराहा, सुंदरपुर, करौंदी आदि इलाकों में भी होली का उल्लास दिखा। काशी की होली पर होली बरात निकालने की भी परंपरा रही है। भगवान शिव के स्वरूप के साथ घोड़े युवाओं की टोलियां बरात के साथ भांग व ठंडई छान और अबीर गुलाल उड़ाते हुए निकले। डीजे की धुन पर सड़के व गलियां थिरकतीं रहीं।
अयोध्या में रामलला का होली श्रृंगार, पगड़ी और पिचकारी संग दिए दर्शन, सरयू घाट पर गूंजे फाग
होली पर श्रीराम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला ने इस बार विशेष होली श्रृंगार में भक्तों को दर्शन दिए। पगड़ी धारण किए और हाथ में पिचकारी लिए रामलला का अलौकिक स्वरूप दिखा। सुबह जैसे ही मंदिर के पट खुले, परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अबीर और गुलाल अर्पित कर प्रभु का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष भोग लगाया गया और होली के अवसर पर आकर्षक सजावट की गई। मठ-मंदिरों में दिन भर होली का उत्सव चलता रहा। साधु-संतों ने फाग और चौताल गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। ढोलक और मंजीरे की थाप पर गाए गए पारंपरिक होली गीतों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सरयू तट पर रंगों और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पहले स्नान किया, फिर एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। कई स्थानों पर फूलों की होली भी खेली गई, जिससे पूरा वातावरण सुगंधित हो उठा।
ब्रजभूमि पर धुलंडी के दिन दिखा रंगों का जश्न
ब्रज की धरती मथुरा और वृंदावन में होली का रंग कई दिनों से चढ़ा हुआ है। यहां मंदिरों में राधा-कृष्ण के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने गुलाल उड़ाया। बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ी। ब्रज की होली देश की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में मानी जाती है। मथुरा और वृंदावन समेत भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े क्षेत्रों में यह उत्सव करीब 10 दिनों तक विभिन्न स्वरूपों में मनाया जाता है। बुधवार को धुलंडी के दिन सड़कों पर रंगों की फुहार और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से पूरा ब्रज क्षेत्र कृष्णमय हो गया। देश-विदेश से आए श्रद्धालु पारंपरिक ब्रज होली का हिस्सा बने। कहीं फूलों की होली खेली गई तो कहीं लठमार की झलक देखने को मिली। गलियों में रंग से भीगे लोग भक्ति गीतों पर झूमते रहे।






