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हनी-ट्रैप स्टाइल साइबर अटैक : सरकारी शिक्षकों के मोबाइल हैक, सरकारी एप ब्रेकडाउन

शादी का निमंत्रण बना साइबर जाल, एपीके फाइल खोलते ही मोबाइल फोन पड़ने लगे ठप, निपुण भारत, दीक्षा, प्रेरणा, सपोर्टिव सुपरविजन और प्रेरणा लक्ष्य जैसे महत्वपूर्ण एप हो गए अचानक बंद

लखनऊ, 2 दिसंबर 2025:

यूपी की राजधानी लखनऊ में एक साधारण सा शादी का निमंत्रण संदेश बेसिक शिक्षा के डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमला साबित हुआ। शादी में विशेष स्वागत संबंधी मैसेज ने विभाग के कई एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) और शिक्षकों को परेशान और उनके डिजिटल सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर दिया।

मैसेज के साथ भेजी गई एपीके (Android Application Package) फाइल खोलते ही उनके मोबाइल फोन एक-एक करके ठप पड़ने लगे। कई शिक्षकों के फोन पर व्हाट्सएप अचानक दूसरे नंबर पर शिफ्ट हो गया। हैकर के कंट्रोल में जाकर वही नकली निमंत्रण सैकड़ों लोगों तक अपने आप फॉरवर्ड होने लगा। देखते ही देखते करीब डेढ़ सौ कॉन्टैक्ट्स तक वही मैसेज पहुंच गया और फोन के लगभग सभी एप्लीकेशन फ्रीज हो गए।

सबसे अधिक असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा। निपुण भारत, दीक्षा, प्रेरणा, सपोर्टिव सुपरविजन और प्रेरणा लक्ष्य जैसे महत्वपूर्ण एप अचानक बंद हो गए। बीकेटी, गोसाईंगंज, सरोजनीनगर और अन्य क्षेत्रों में शिक्षकों और एआरपी के मोबाइल हैक होने से प्रेरणा डीबीटी के तहत छात्रों का पंजीकरण, उपस्थिति अपलोडिंग और डाटा सबमिशन सोमवार को पूरे दिन बाधित रहा। कई विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं भी निरस्त करनी पड़ीं क्योंकि शिक्षक अपने मोबाइल या टैबलेट से किसी भी डिजिटल कार्य में लॉगइन ही नहीं कर पाए।

कुछ शिक्षकों के अनुसार एपीके फाइल का ‘केस-2’ नाम का पैकेज खोलते ही स्क्रीन ब्लैक हो गई और कैलेंडर, क्यूआर स्कैनर, कैमरा से लेकर बैंकिंग एप्स तक काम करना बंद हो गए। इस कारण निपुण भारत मिशन से जुड़े निगरानी, मूल्यांकन और लर्निंग आउटकम रिकॉर्डिंग की प्रक्रियाएं भी बाधित हो गईं।

अधिकारियों का कहना है कि कई शिक्षकों ने मामले की जानकारी फोन पर दी। कुछ अधिकारियों के मोबाइल पर भी यही संदिग्ध फाइल पहुंची थी, लेकिन उन्होंने उसे खोलने से पहले ही डिलीट कर दिया। विभाग ने सभी शिक्षकों को चेताते हुए कहा है कि किसी भी अनजान एप्लिकेशन फाइल को न चलाएं और सतर्क रहें।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी एपीके फाइलों का उपयोग हैकर्स अक्सर भरोसेमंद नामों और रिश्तेदारों की पहचान का सहारा लेकर करते हैं। इन फाइलों के जरिए वे न सिर्फ फोन का डाटा चुराते हैं बल्कि पीड़ित के नाम से रकम मांगने जैसे धोखे भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी संदिग्ध फाइल को खोलने के बजाय तुरंत साइबर सेल या नजदीकी साइबर सहायता केंद्र को सूचित करें।

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