लखनऊ, 25 फरवरी 2026:
भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, हिन्दुस्तानी एकेडेमी व जवाहर लाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से 27 व 28 फरवरी को यह कार्यक्रम आयोजित होगा। संगोष्ठी का विषय शिक्षा, संस्कृति और संस्कार का प्रसार रखते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, बौद्ध दर्शन और साहित्य पर आसान और समझने योग्य तरीके से चर्चा की जाएगी।
देशभर के शोधार्थी और विद्वान लेंगे हिस्सा
कार्यक्रम का आयोजन महराजगंज स्थित कॉलेज परिसर में किया जाएगा, जहां देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और संस्थानों से आए विद्वान, शोधार्थी और छात्र भाग लेंगे। संगोष्ठी में खास तौर पर संस्कृत और पालि भाषा की भूमिका, बौद्ध साहित्य की विरासत और भारतीय शिक्षा परंपरा के प्रभाव पर विस्तार से विचार रखा जाएगा। वक्ताओं द्वारा यह भी बताया जाएगा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था और बौद्ध विचारधारा ने समाज को किस तरह दिशा दी और आज के दौर में उसकी अहमियत क्यों बनी हुई है।

युवाओं को विरासत से जोड़ने की पहल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल इतिहास की बात नहीं है, बल्कि आज के समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी रास्ता दिखाती है। उनके अनुसार इस आयोजन से छात्रों और शोधार्थियों को बौद्ध दर्शन, संस्कृत और पालि जैसी प्राचीन भाषाओं को समझने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मौका मिलेगा।
शोध और संवाद का मिलेगा मंच
दो दिन चलने वाली यह संगोष्ठी छात्रों और शोध कार्य से जुड़े लोगों के लिए खास अवसर मानी जा रही है। यहां विशेषज्ञों के विचार सुनने के साथ संवाद और अध्ययन का माहौल तैयार होगा, जिससे नए शोध और अकादमिक चर्चा को बढ़ावा मिलेगा।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान की स्थापना वर्ष 1985 में उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा की गई थी। यह एक स्वायत्त संस्था है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित बौद्ध परंपराओं का अध्ययन, शोध कार्य को बढ़ावा देना और बौद्ध स्थलों से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर व मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना है।






