लखनऊ, 8 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ जल्द ही देश के सबसे अनूठे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संग्रहालयों में शुमार होने जा रही है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी करने की अनुमति भी दी गई है।
यह परियोजना प्रदेश की जनजातीय विरासत, लोक परंपराओं और भारतीय जीवन दर्शन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगी। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार यह केवल एक संग्रहालय नहीं बल्कि यूपी की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र होगा। यहां प्रदेश की प्रमुख जनजातियों की संस्कृति, जीवनशैली, आध्यात्मिक विचार और लोक ज्ञान को अत्याधुनिक इंटरैक्टिव गैलरियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवासीय ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, प्रशासनिक भवन, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का वास्तुशिल्प पारंपरिक भारतीय शैली और आधुनिक डिजाइन का आकर्षक संगम होगा।

संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका अभिनव क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा। इसमें भारतीय जीवन यात्रा को जन्म से मृत्यु तक तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाएगा। 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए आध्यात्मिक अवधारणाओं को सजीव रूप दिया जाएगा।
गैलरी-1 में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को प्रदर्शित किया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर विशेष ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को होलोग्राम और पीतल की भित्ति चित्रों के माध्यम से आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
गैलरी-2 जन्म और शिक्षा से जुड़े संस्कारों की यात्रा को दर्शाएगी। गैलरी-3 गृहस्थ जीवन, विवाह, पूजा-पद्धति और दैनिक अनुष्ठानों की जीवंत झलक पेश करेगी। तुलसी पूजा, आरती, गौ सेवा और ‘अतिथि देवो भव’ जैसे भारतीय मूल्यों को अनुभवात्मक रूप में दिखाया जाएगा।

संग्रहालय परिसर में एक विशेष बाहरी अनुभव क्षेत्र भी विकसित होगा, जहां वानप्रस्थ, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे जीवन के अंतिम चरणों को प्रकृति के माध्यम से समझाया जाएगा। जलधाराएं, दीप स्तंभ, यज्ञ कुंड और खुले प्राकृतिक स्थल आगंतुकों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेंगे।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना लखनऊ को सांस्कृतिक पर्यटन का नया केंद्र बनाएगी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भारतीय परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम साबित होगी।






