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‘बीमा सबके लिए’: अब कॉमिक्स से समझें जीवन बीमा, हर परिवार तक सुरक्षा पहुंचाने की नई पहल

आईआरडीएआई चेयरमैन अजय सेठ ने लॉन्च की उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक श्रृंखला, जीवन बीमा क्षेत्र के लीडर एक साथ आए, आसान कहानियों के जरिए समझाए जाएंगे जीवन बीमा के जरूरी नियम और फायदे

मुंबई, 8 जुलाई 2026:

जीवन बीमा को आम लोगों के लिए आसान और समझने योग्य बनाने की दिशा में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने नई पहल की है। राष्ट्रीय बीमा जागरूकता दिवस के अवसर पर आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ ने उपभोक्ता जागरूकता कॉमिक बुक श्रृंखला का अनावरण किया। इस पहल का उद्देश्य ‘बीमा सबके लिए (Insurance for All)’ के विजन को मजबूत करते हुए लोगों के बीच जीवन बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जटिल माने जाने वाले बीमा नियमों को सरल भाषा में समझाना है।

इस मौके पर जीवन बीमा क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए और देश के हर परिवार तक जीवन बीमा की पहुंच बढ़ाने का संकल्प दोहराया। कॉमिक बुक श्रृंखला में एमडब्ल्यूपी (Married Women’s Property Act), वेवर ऑफ प्रीमियम (Waiver of Premium) और गंभीर बीमारी राइडर जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को तकनीकी शब्दों के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानियों के माध्यम से समझाया गया है।

कॉमिक्स की मुख्य पात्र युवा बीमा सलाहकार सुप्रिया है, जिसके अनुभवों और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के जरिए यह दिखाया गया है कि समय पर लिए गए वित्तीय फैसले भविष्य में परिवार की आर्थिक सुरक्षा को कैसे मजबूत बनाते हैं। इस कहानी-आधारित तरीके का उद्देश्य अलग-अलग आयु वर्ग और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों तक बीमा की जानकारी सहज रूप से पहुंचाना है।

आईएसी-लाइफ के अध्यक्ष कमलेश राव ने कहा कि भारत तेजी से समावेशी और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में परिवारों की वित्तीय तैयारी मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘बीमा सबके लिए’ केवल बीमा बेचने का अभियान नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार की वित्तीय योजना में सुरक्षा को शामिल करने का राष्ट्रीय प्रयास है। उनके अनुसार जीवन बीमा लोगों को आर्थिक आत्मविश्वास देता है और भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करता है।

कमलेश राव ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान आईएसी-लाइफ ने ‘बीमा सबसे पहले’ अभियान के दूसरे चरण के तहत कई जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं। आने वाले समय में उपभोक्ता सहभागिता को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के महासचिव आदित्य गुप्ता ने कहा कि जीवन बीमा केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं अपितु परिवारों से किया गया सुरक्षा का वादा है। उन्होंने कहा कि उद्योग ने अपनी पहुंच बढ़ाई है लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि बीमा से जुड़ी बातचीत को सरल, सहज और हर उपभोक्ता के लिए समझने योग्य बनाया जाए। कॉमिक बुक श्रृंखला इसी दिशा में एक अभिनव प्रयास है।

कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया आस्क्स: व्हाई प्रायोरिटाइज लाइफ इंश्योरेंस?’ विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित हुई। इसमें आईएसी-लाइफ के अध्यक्ष कमलेश राव, एलआईसी के प्रबंध निदेशक दोराईस्वामी, पीएनबी मेटलाइफ के एमडी एवं सीईओ समीर बंसल तथा इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ रुशभ गांधी ने भाग लिया। चर्चा का संचालन वरिष्ठ वित्तीय पत्रकार सोनिया शेनॉय ने किया। विशेषज्ञों ने माना कि देश में अब भी बड़ी संख्या में परिवार जीवन की आकस्मिक परिस्थितियों के लिए आर्थिक रूप से तैयार नहीं हैं और इस ‘प्रोटेक्शन गैप’ को कम करने के लिए जीवन बीमा की पहुंच बढ़ाना आवश्यक है।

उद्योग के आंकड़े भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत देते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जीवन बीमा उद्योग का नया व्यवसाय प्रीमियम (एनबीपी) सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत बढ़ा और 2.83 करोड़ से अधिक नई बीमा पॉलिसियां जारी की गईं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा की पैठ अभी भी देश की आर्थिक वृद्धि के अनुरूप नहीं है। ऐसे में जागरूकता, वित्तीय साक्षरता और भरोसा बढ़ाने जैसे प्रयास ही हर भारतीय परिवार तक बीमा सुरक्षा पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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