Uttar Pradesh

काशी ने रचा हरियाली का विश्व रिकॉर्ड: एक घंटे में ढाई लाख पौधे, ‘मिनी काशी’ का सपना साकार

एक घंटे में रोपे 2,51,446 पौधे, चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त, सेना, एनडीआरएफ, पुलिस, शिक्षक और हजारों विद्यार्थियों के योगदान से सुजाबाद डोमरी बना ऑक्सीजन बैंक, ड्रोन कैमरों और डिजिटल गणना तंत्र के जरिए सटीक पुष्टि के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ने नए रिकॉर्ड की घोषणा की

वाराणसी/लखनऊ, 2 मार्च 2026:

काशी के लिए रविवार का दिन इतिहास बन गया। वाराणसी के सुजाबाद-डोमरी क्षेत्र में आयोजित वृहद पौधरोपण महाभियान में काशीवासियों ने मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाकर दुनिया का नया कीर्तिमान रच दिया। इस उपलब्धि के साथ आठ साल पुराना चीन का रिकॉर्ड टूट गया। काशी का नाम पर्यावरण के वैश्विक मानचित्र पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए Guinness World Records की टीम सुबह से ही मौके पर मौजूद रही। सटीक गणना और ड्रोन कैमरों से निगरानी के बाद रिकॉर्ड की आधिकारिक घोषणा की गई और नगर निगम के प्रतिनिधियों को प्रमाणपत्र सौंपा गया। पूरे आयोजन में नगर निगम, सामाजिक संगठनों, सरकारी विभागों और हजारों स्वयंसेवकों का समन्वय देखने को मिला।

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350 बीघा क्षेत्र में विकसित किया गया यह ‘शहरी वन’ सिर्फ पौधरोपण नहीं बल्कि काशी की आत्मा से जुड़ी एक अनोखी कल्पना है। पूरे वन को 60 सेक्टरों में बांटा गया है। उनके नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों पर रखे गए हैं। भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे तो यह क्षेत्र गंगा तट के समान हरियाली से सजी एक ‘मिनी काशी’ का रूप ले लेगा। हर सेक्टर में लगभग 4,000 पौधे लगाए गए हैं।

इस अभियान में 27 देशी प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी गई। शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस के साथ ही आम, अमरूद, पपीता जैसे फलदार वृक्ष और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधीय वनस्पतियाँ भी लगाई गईं। यह विविधता जैव-विविधता बढ़ाने के साथ आने वाले वर्षों में स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा करेगी।

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पौधों की तेज और सघन वृद्धि के लिए ‘मियावाकी तकनीक’ अपनाई गई है जिसे जापानी वनस्पति विज्ञानी अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इस तकनीक के तहत पौधे सामान्य की तुलना में कई गुना तेज बढ़ते हैं और दो-तीन वर्षों में क्षेत्र एक घने ‘ऑक्सीजन बैंक’ में बदल सकता है। सिंचाई के लिए आधुनिक पाइपलाइन, बोरवेल और ‘रेन गन’ सिस्टम लगाए गए हैं ताकि जल की बर्बादी न हो और पौधे सुरक्षित रहें।

इस महाअभियान में स्कूल-कॉलेजों के छात्रों, एनसीसी-एनएसएस के स्वयंसेवकों, सेना और अर्धसैनिक बलों, एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, सिविल डिफेंस और पुलिस बल की सक्रिय भागीदारी रही। ‘नमामि गंगे’ और वन विभाग सहित कई विभागों ने तकनीकी सहयोग दिया। यह दृश्य काशी के सामूहिक संकल्प और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बन गया।

यह परियोजना केवल पर्यावरण सुधार तक सीमित नहीं है बल्कि नगर निगम के लिए भविष्य में आय का स्रोत भी बनेगी। तीसरे वर्ष से ही लाखों पौधों की देखभाल और उपज से नियमित आय की संभावना जताई गई है। इस रिकॉर्ड के जरिए काशी ने दिखा दिया कि वह अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोते हुए आधुनिक और टिकाऊ विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।

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