वाराणसी, 3 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वाराणसी अब केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनकर उभरी है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद गंगा घाटों, मंदिरों और शहरी ढांचे में हुए बदलावों ने काशी की तस्वीर ही बदल दी है। इसका सीधा असर पर्यटक आंकड़ों में दिखा, जहां वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 7 करोड़ 26 लाख से अधिक श्रद्धालु काशी पहुंचे।
पर्यटन विभाग के अनुसार, 2025 में काशी आने वाले श्रद्धालुओं में 2 करोड़ 87 लाख लोग प्रयागराज महाकुंभ के पलट प्रवाह से पहुंचे। त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। महाशिवरात्रि और सावन माह में भी काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने वालों की संख्या सर्वाधिक रही, जिसे संभालने के लिए प्रशासन ने विशेष प्रबंधन किया।

धार्मिक पर्यटन में बढ़ती युवा भागीदारी भी इस बदलाव का बड़ा संकेत है। 24 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के बीच 30 लाख 75 हजार 769 श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया कि अब युवा पीढ़ी के लिए भी काशी आस्था के साथ उत्सव का केंद्र बन चुकी है। नए साल पर काशी का माहौल किसी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक शहर जैसा नजर आया।
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार, सनातन संस्कृति में उत्सव और आस्था एक साथ चलते हैं। वर्तमान समय में हर पर्व पर श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व प्रवाह इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक स्थलों पर जनता का भरोसा बढ़ा है। यह भरोसा बेहतर व्यवस्थाओं और सुरक्षित माहौल से और मजबूत हुआ है।
सीएम योगी के विजन के तहत काशी, प्रयागराज और अयोध्या को एक पवित्र त्रिकोण के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस रणनीति का असर तीनों तीर्थों में पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के रूप में सामने आया है। बेहतर कनेक्टिविटी, सुविधाएं और धार्मिक आयोजनों के सुनियोजित प्रबंधन ने काशी को देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।






