लखनऊ, 1 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) अपने डॉक्टरों की करतूतों के चलते इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में पिछले पंद्रह दिनों के भीतर रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों के खिलाफ दो गंभीर मामले सामने आए हैं। एक मामले में धर्मांतरण के दबाव और शोषण का आरोप लगाया गया है, जबकि ताजा मामले में एक नर्सिंग छात्रा ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और निजी तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। दोनों ही मामलों में पुलिस जांच कर रही है। दोनों आरोपी डॉक्टर फरार हैं।
नया मामला केजीएमयू में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने दर्ज कराया है। पीड़िता का आरोप है कि केजीएमयू में इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर मोहम्मद आदिल ने पहले दोस्ती की फिर प्रेम का इजहार किया और शादी का वादा करते हुए भरोसा जीता। छात्रा के अनुसार शादी का भरोसा दिलाकर आरोपी ने उसे शहर के एक फ्लैट में बुलाया और कई बार शारीरिक संबंध बनाए। जब छात्रा ने शादी का आग्रह किया तो आदिल ने मना कर दिया और निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी। आरोपों के आधार पर पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक प्राथमिकी में दर्ज बिंदुओं की जांच की जा रही है। मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार आरोपी इंटर्न के बैकग्राउंड और संभावित ठिकानों की तलाश भी की जा रही है। अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इससे पहले केजीएमयू में ही पश्चिम बंगाल की रहने वाली एक रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने सहयोगी डॉक्टर रमीजुद्दीन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में रमीजुद्दीन पर आरोप है कि उन्होंने शादी के नाम पर संबंध बनाए और कथित रूप से धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी सुर्खियों में आ गया।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को स्वयं पीड़िता से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए निर्देश जारी किए। फिलहाल आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन फरार बताया जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन भी जांच मोड में है। पैथोलॉजी विभाग में सात सदस्यीय जांच टीम साक्ष्य और बयान जुटाने में लगी हुई है। जांच समिति में वे प्रोफेसर भी शामिल हैं जिन पर लैब परिसर में धार्मिक गतिविधियां करने के आरोप लगे थे। विभागाध्यक्ष के बयान अभी लंबित हैं क्योंकि वे फिलहाल विश्वविद्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।
इन मामलों ने संस्थान की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच छात्र समुदाय में भी चिंता का माहौल है। कई छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल बनाए रखने के लिए त्वरित और ठोस कदम आवश्यक हैं।
फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है।






