लखनऊ, 4 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के अगले कुलपति की नियुक्ति को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। वर्तमान कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है। नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ कई दलों के सांसदों एवं नेताओं ने सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है।
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद, सपा सांसद एवं प्रदेश के पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा, सपा सांसद एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री आरके चौधरी तथा पूर्व मंत्री एवं अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति को पत्र भेजकर मांग की है कि इस बार केजीएमयू का कुलपति दलित या पिछड़े वर्ग के योग्य शिक्षाविद् को बनाया जाए।

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपने पत्र में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के शीर्ष पदों पर एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने से सामाजिक न्याय और संविधान की भावना प्रभावित होती है। उन्होंने केजीएमयू में ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने वर्तमान कुलपति के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आरक्षित वर्ग के 108 शैक्षिक पदों में केवल 30 नियुक्तियां की गईं, जबकि 78 पद नॉट फाउंड सूटेबल बताकर रिक्त छोड़ दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब 100 बैकलॉग पद अब तक विज्ञापित नहीं किए गए जबकि शिक्षकों की कमी के बावजूद संविदा पर नियुक्तियां होती रहीं। मौर्य ने कहा कि दलित-पिछड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अगला कुलपति इन्हीं वर्गों से नियुक्त किया जाना चाहिए।

अंबेडकरनगर से सांसद लालजी वर्मा ने अपने पत्र में कहा कि 100 वर्ष से अधिक पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान के इतिहास में अब तक किसी दलित या पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को कुलपति बनने का अवसर नहीं मिला है। उन्होंने इसे बदलते हुए ऐतिहासिक पहल करने की अपील की है।
मोहनलालगंज से सांसद आरके चौधरी ने भी दावा किया कि पिछली नियुक्तियों में अक्सर नॉट फाउंड सूटेबल का आधार बनाकर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इस बार इन वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की।






