एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 16 मार्च 2026:
निगोहां इलाके में घरेलू गैस की किल्लत का असर अब घर से सैकड़ों किमी दूर बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी दिखने लगा है। कॉलेज में बीटेक, बीफार्मा समेत दूसरे कोर्स करने वाले कई छात्र इन दिनों खाने की परेशानी से जूझ रहे हैं। पेट भरने के लिए ये छात्र भीगे चने और सलाद से काम चला रहे हैं। भूख बर्दाश्त न होने पर एक समय किसी होटल या ढाबे का सहारा लेना पड़ता है।
निगोहां स्थित बाबू सुंदर सिंह इंजीनियरिंग कॉलेज के आसपास कस्बों में निजी हॉस्टल और किराए के कमरों में करीब 250 से 300 छात्र रहते हैं। गैस न मिलने से इनके सामने खाना बनाने की दिक्कत खड़ी हो गई है। ‘द हो हल्ला’ ने आसपास रहने वाले छात्रों की तकलीफ साझा की। इस दौरान बीटेक के छात्र आलोक ने बताया कि गैस संकट का सबसे ज्यादा असर उन्हीं छात्रों पर पड़ा है जो किराए के कमरों में रहते हैं। उनके पास अपना गैस कनेक्शन नहीं है। पहले कस्बे में कुछ लोग दो किलो वाला गैस सिलेंडर दे देते थे, जिससे किसी तरह खाना बन जाता था, लेकिन अब यह भी बंद हो गया है।

आजमगढ़ के रहने वाले छात्र राज तिवारी, शुभम, शिवम और अरविंद ने बताया कि मजबूरी में अब उन्हें अलग तरीके से काम चलाना पड़ रहा है। सुबह के खाने के लिए वे रात में ही चने या दाल पानी में भिगो देते हैं। सुबह उसी के साथ सलाद काटकर नमक डालकर खा लेते हैं। शाम को होटल या ढाबे पर जाकर खाना खा लेते हैं।
छात्र उत्कर्ष, उत्सव सिंह और अमन जायसवाल का कहना है कि अगर जल्द कोई हल नहीं निकला तो परेशानी और बढ़ सकती है। छात्रों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि किराए के कमरों और निजी हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों के लिए गैस या भोजन की कोई व्यवस्था की जाए।
भोजन की परेशानी बढ़ने पर अंकित, राहुल, उत्कर्ष, मनीष और संदीप समेत करीब 20 से ज्यादा छात्र फिलहाल अपने घर लौट चुके हैं। छात्रों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो और भी छात्रों को घर जाना पड़ सकता है।







