योगी कैबिनेट का लखनऊ को तोहफा : 265 करोड़ से बनेगा बस टर्मिनल, 18 शहरों में दौड़ेंगी 1,725 इलेक्ट्रिक बसें
वृंदावन योजना में 7.06 एकड़ जमीन पर बनेगा आधुनिक टर्मिनल, यात्रियों को मिलेंगी एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, पीपीपी मॉडल पर होगा निर्माण और संचालन, लखनऊ और कानपुर को 300-300 बसें, वाराणसी को 250 और गोरखपुर को मिलेंगी 150 बसें, 12 मीटर की बस पर 40 लाख और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान

लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026:
यूपी में शहरी सफर को बेहतर बनाने के लिए योगी कैबिनेट ने दो बड़े फैसले किए हैं। लखनऊ की वृंदावन योजना में 265 करोड़ रुपये से आधुनिक इंटीग्रेटेड सिटी बस टर्मिनल बनाया जाएगा। वहीं, प्रदेश के 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। दोनों परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी रहेगी। इनसे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए बुनियादी सुविधाएं बढ़ेंगी और यात्रियों को बेहतर परिवहन सेवा मिल सकेगी।
वृंदावन योजना में बनेगा आधुनिक बस टर्मिनल
यूपी की राजधानी लखनऊ में वृंदावन योजना स्थित पी-4 पार्किंग में 7.06 एकड़ क्षेत्रफल पर इंटीग्रेटेड सिटी बस टर्मिनल और वाणिज्यिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसका मकसद इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त टर्मिनल तैयार करना है, जहां यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिल सकें।
265 करोड़ रुपये में तैयार होगी परियोजना
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के मुताबिक, परियोजना की अनुमानित लागत 265 करोड़ रुपये है। इसमें 60 करोड़ रुपये बस टर्मिनल के निर्माण और 205 करोड़ रुपये वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। इस लागत में जमीन की कीमत शामिल नहीं है। परियोजना का क्रियान्वयन नगरीय परिवहन निदेशालय करेगा। इसके लिए डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल अपनाया जाएगा।
116 बसों के बाद 300 और इलेक्ट्रिक बसों की तैयारी
फिलहाल लखनऊ में दुबग्गा डिपो से 116 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा 300 और इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया चल रही है। इनके लिए अलग टर्मिनल की जरूरत को देखते हुए वृंदावन योजना में नई सुविधा विकसित करने का फैसला किया गया है।

टिकट काउंटर से चार्जिंग स्टेशन तक की सुविधा
प्रस्तावित टर्मिनल पर बसों के आने-जाने के लिए बस-वे, पार्किंग, इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग स्टेशन, मरम्मत की व्यवस्था, कर्मचारियों के विश्राम कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय और सुरक्षा कक्ष बनाए जाएंगे। यात्रियों के लिए टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, प्रतीक्षालय और सामान रखने की सुविधा होगी।
रेस्तरां, दुकानें और एटीएम भी बनेंगे
टर्मिनल परिसर में रेस्तरां, कॉफी शॉप, फास्ट फूड आउटलेट, व्यावसायिक दुकानें, मेडिकल स्टोर, बैंक, एटीएम, सार्वजनिक शौचालय, वाटर एटीएम, टैक्सी स्टैंड और सार्वजनिक पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी। आग से बचाव के लिए अग्निशमन व्यवस्था भी परियोजना में शामिल है।
निर्माण के बाद निदेशालय को सौंपा जाएगा टर्मिनल
परियोजना के तहत विकासकर्ता को डिजाइन, ड्राइंग और स्पेसिफिकेशन की अंतिम मंजूरी नगरीय परिवहन निदेशालय से लेनी होगी। निर्माण पूरा होने के बाद बस टर्मिनल निदेशालय को मुफ्त में हस्तांतरित किया जाएगा। हालांकि, टर्मिनल और उससे जुड़ी सुविधाओं का संचालन और प्रबंधन विकासकर्ता करेगा। बस टर्मिनल का रखरखाव 35 साल और वाणिज्यिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे का रखरखाव 90 साल तक करना होगा।परियोजना के लिए आमंत्रित निविदा में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया। इनमें सबसे अधिक बोली लगाने वाली ओबेक्स लिमिटेड को परियोजना आवंटित करने का प्रस्ताव है।
18 शहरों में 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें
कैबिनेट ने प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी जीसीसी मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। योजना में 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 साल होगी।
लखनऊ और कानपुर को सबसे ज्यादा 300-300 बसें
योजना के तहत आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25 और नोएडा में जेवर सहित 100 बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 इलेक्ट्रिक बसें संचालित होंगी।
जीसीसी मॉडल पर निजी ऑपरेटर संभालेंगे जिम्मेदारी
इस मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसें खरीदेंगे, चार्जिंग स्टेशन के लिए जरूरी चार्जर की व्यवस्था करेंगे और चालक व तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती करेंगे। बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। तय प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन और रखरखाव शुल्क दिया जाएगा। यात्रियों से लिए जाने वाले किराये का निर्धारण सरकार करेगी।
12 मीटर की बस पर 40 लाख रुपये का अनुदान
योजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस की खरीद पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान देने का फैसला किया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो बनाने को संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से जरूरत के मुताबिक जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
यूपी में बनी बसों को खरीद में प्राथमिकता
नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद में परिवहन विभाग की निर्धारित नीति के तहत एल-1 दर पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। सरकार के मुताबिक, निजी निवेश से बस संचालन पर सरकारी खर्च का बोझ कम करने, सेवा की गुणवत्ता सुधारने और समयबद्ध संचालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। निविदा के जरिए चुने गए निजी ऑपरेटरों को दक्षता और यात्रियों की संतुष्टि से जुड़े मानकों पर काम करना होगा। यूपी में बनी बसों को प्राथमिकता मिलने से बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।






