Lucknow City

Road Accidents घटे, पर मौतों ने बढ़ाई टेंशन: 1100 से ज्यादा स्कूल वाहनों की फिटनेस-परमिट एक्सपायर

लखनऊ मंडल में 8 माह में मृतकों की संख्या 12.9% बढ़ी, मंडलायुक्त ने ब्लैक स्पॉट की केस स्टडी से लेकर हिट एंड रन के पुराने मामलों के निस्तारण तक दिए सख्त निर्देश, 227 मामलों में 198 का निस्तारण, स्कूल वाहनों की सत्यापित सूची तैयार करने के आदेश

लखनऊ, 26 सितंबर 2026:

यूपी के लखनऊ मंडल में सड़क दुर्घटनाओं की तस्वीर कुछ हद तक सुधरी है लेकिन हादसों में होने वाली मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच मंडल में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10.4 प्रतिशत और घायलों की संख्या 12.2 प्रतिशत कम हुई लेकिन मृतकों की संख्या 12.9 प्रतिशत बढ़ गई। यानी हादसे कम हुए, फिर भी जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़ गया।

इसी गंभीर स्थिति को लेकर शनिवार को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में आयुक्त सभागार में मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट, हिट एंड रन, कैशलेस इलाज और विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा समेत सड़क सुरक्षा से जुड़े तमाम मुद्दों की समीक्षा की गई।

चार जिलों में हादसे घटे, लखनऊ-लखीमपुर में बढ़े

बैठक में सामने आया कि मंडल के उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर और हरदोई में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई है जबकि लखनऊ और लखीमपुर खीरी में दुर्घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि केवल आंकड़ों की समीक्षा तक सीमित न रहा जाए बल्कि दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनके स्थायी समाधान पर काम किया जाए।

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26 गंभीर हादसों की जांच पूरी, अब ‘स्पेसिफिक रीजन’ की तलाश

जनवरी से अगस्त 2026 तक तीन या उससे अधिक मौत वाली 26 सड़क दुर्घटनाओं की जांच पूरी की गई है। पिछले साल ऐसी 29 दुर्घटनाओं की जांच हुई थी। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक गंभीर दुर्घटना स्थल की विस्तृत केस स्टडी तैयार की जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि हादसे के पीछे सड़क की स्थिति, तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही, यातायात व्यवस्था, दृश्यता, प्रकाश व्यवस्था या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।

उन्होंने कहा कि सिर्फ ब्लैक स्पॉट चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटना के विशिष्ट कारण का पता लगाकर उसी के अनुरूप स्थायी सुधार कराया जाए। मंडल में वर्ष 2025 में चिन्हित ब्लैक स्पॉट में लखनऊ में 75, रायबरेली में 45, सीतापुर में 28, लखीमपुर खीरी में 25, उन्नाव में 33 और हरदोई में 67 स्थान शामिल हैं।

हिट एंड रन के 25 पुराने मामले अभी बाकी

हिट एंड रन मामलों की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2025 तक 227 मामले चिन्हित किए गए थे। इनमें 198 का निस्तारण हो चुका है, जबकि 25 मामले अभी लंबित हैं। मंडलायुक्त ने पुराने मामलों को प्राथमिकता से निस्तारित करने और पात्र मृतकों के आश्रितों व घायलों को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने के निर्देश दिए। बैठक के अनुसार पिछली समीक्षा के बाद 106 लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया गया है।

स्कूल वाहनों पर भी सख्ती, 575 की फिटनेस और 525 के परमिट एक्सपायर

विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में गंभीरता दिखाई गई। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 तक मंडल में 10,395 विद्यालयी वाहन दर्ज हैं। इनमें 7,088 विद्यालयों के नाम पंजीकृत और 3,307 अनुबंध पर संचालित वाहन हैं।
चिंता की बात यह है कि इसी अवधि में 575 वाहनों की फिटनेस और 525 वाहनों के परमिट समाप्त पाए गए। मंडलायुक्त ने ऐसे वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और किसी भी स्तर पर विद्यार्थियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों की विद्यालयवार सत्यापित सूची तैयार कराने को कहा। इसमें वाहन का स्वामित्व, अनुबंध की स्थिति, फिटनेस और परमिट का विवरण दर्ज किया जाएगा। विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों को नियमित बैठक कर वाहनों के दस्तावेज, चालकों का पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण तथा अन्य सुरक्षा मानकों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए।

गोल्डन ऑवर में इलाज पर जोर

सड़क हादसों में घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के लिए कैशलेस उपचार योजना की भी समीक्षा हुई। मंडलायुक्त ने स्वास्थ्य, परिवहन और पुलिस विभाग को बेहतर समन्वय के निर्देश दिए जिससे दुर्घटना के बाद घायल को जल्द से जल्द निकटतम सूचीबद्ध अस्पताल पहुंचाकर गोल्डन ऑवर में उपचार मिल सके।

लखनऊ में 15 निजी अस्पतालों के साथ सभी राजकीय अस्पताल सूचीबद्ध हैं और 32 लाभार्थी योजना में दर्ज हैं। उन्नाव में 25 निजी, रायबरेली में 12, सीतापुर में 23, लखीमपुर खीरी में 4 और हरदोई में 17 निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं। हरदोई में 44 सरकारी अस्पताल भी सूचीबद्ध हैं। बैठक में मंडलायुक्त ने पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, एलडीए, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ सड़क सुरक्षा के निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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