
लखनऊ, 16 जुलाई 2026:
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रकृति प्रेम का पर्व हरेला गुरुवार को लखनऊ में प्रवासी उत्तराखंड समाज की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक विधि-विधान के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। कल्याणपुर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य आनंद जोशी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हरेला की प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना के साथ किया। इसके बाद समाज की बुजुर्ग महिलाओं ने पारंपरिक रीति के अनुसार बच्चों और बड़ों के सिर पर हरेला रखकर उन्हें मंगल आशीर्वाद दिया। इस दौरान सभी ने पारंपरिक हरेला गीत ‘जी रया, जागि रया’ गाकर सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की।

कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की मनमोहक झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक झोड़ा नृत्य की प्रस्तुति ने माहौल को उत्सव के रंग में रंग दिया। वहीं, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उपस्थित लोगों को 150 पौधे भेंट किए गए। सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया।
भरत सिंह बिष्ट ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व ही नहीं अपितु उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जन जागरूकता का प्रतीक है। इस अवसर पर गिरधर सिंह मनराल, पूरन सिंह जीना, पूरन जोशी, लाल सिंह बिष्ट, शोभा पटवाल, रेखा गोस्वामी, शशि जोशी, पार्वती फर्त्याल, हेमा कांडपाल, गीता बिष्ट, हेमा अधिकारी, अंजू पंत, नीमा लटवाल, हेमा बिष्ट सहित कई प्रवासी उत्तराखंडवासी उपस्थित रहे।






