महर्षि वाल्मीकि जयंती : गूंजेंगे रामायण पाठ, मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन व दीपदान
26 अक्टूबर को धूमधाम से मनाई जाएगी जयंती, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन, लव-कुश प्रसंग से जीवंत होगी रामायण की विरासत, मंदिरों की जीपीएस लोकेशन पोर्टल पर होगी उपलब्ध

लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026ः
महर्षि वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर को यूपी में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव होगा। प्रदेश के सभी जिलों में महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए वाल्मीकि की कालजयी रचना रामायण में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी है।
वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में होंगे कार्यक्रम
चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों द्वारा लोक भजन के कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा तमसा गंगा नदी (जिसे वाल्मीकि नदी भी कहा जाता है) के घाट पर वाल्मीकि आरती होगी। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्दालु शामिल होते हैं।
देशभर में 280 ऐतिहासिक स्थल, इसमें कुछ यूपी में
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण कृति है। इसमें वर्णित अनेक स्थलों को राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाना जाता है। देशभर में ऐसे करीब 280 स्थल मौजूद हैं, जिनमें यूपी के भी कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। उन्होंने बताया इन स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के लिए मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ 8, 12 या 24 घंटे तक लगातार वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
लवकुश प्रसंग का होगा आयोजन
इस आयोजन में पूजन-हवन के साथ लवकुश प्रसंग समेत अन्य कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर कानपुर, वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या, प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश में आयोजन होगा। आयोजनों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक जिले में जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। डीएम अपनी अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से कार्यक्रम स्थलों और कलाकारों का चयन करेंगे। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने व आम लोगों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रामायण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा
मंत्री ने बताया कि कलाकारों के मानदेय के भुगतान के लिए प्रत्येक जिले को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इस मद में कुल 75 लाख रुपये जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों को उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, कार्यक्रमों की अन्य व्यवस्थाएं जिला प्रशासन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से करेगा। उन्होंने बताया प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की विरासत को सम्मान देने के साथ रामायण के संदेशों, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को व्यापक जनभागीदारी के जरिए आगे बढ़ाना है। गायक कलाकारों और भजन मंडलियों का चयन कर उन्हें समय रहते सूचना दी जाएगी। मंदिरों और स्थलों की पहचान के साथ उनके नाम-पते, फोटो, जीपीएस लोकेशन और मंदिर प्रबंधकों के संपर्क विवरण संस्कृति विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध होंगे।






