लखनऊ, 2 मार्च 2026:
यूपी में सामाजिक परिवर्तन की बयार अब जमीन पर साफ दिखने लगी है। आत्मनिर्भरता की इस लहर में महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लॉक के हरखपुर गांव की रहने वाली रजनी बाला इसकी सशक्त मिसाल हैं। उन्होंने पारंपरिक मूंज शिल्प को रोजगार और सम्मान की पहचान दिलाई है।
12वीं तक पढ़ाई वाली रजनी बाला को मूंज शिल्प का हुनर अपनी मां से विरासत में मिला। बचपन से ही घर में बुनाई-बटाई का माहौल रहा। इसने उनके हाथों में हुनर और मन में आत्मविश्वास भर दिया। आज रजनी सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसे आकर्षक मूंज उत्पाद तैयार करती हैं। बाजार की मांग को समझकर उन्होंने डिजाइन और फिनिशिंग में भी नयापन जोड़ा जिससे उनके उत्पादों को अलग पहचान मिली।
आर्थिक रूप से यह काम रजनी के लिए वरदान साबित हुआ। वे बताती हैं कि औसतन हर उत्पाद पर करीब 50 प्रतिशत तक शुद्ध लाभ हो जाता है। ₹100 की लागत वाले उत्पाद का बाजार मूल्य लगभग ₹150 तक मिल जाता है। उनके पति दिल्ली में निजी कंपनी में कैब चालक हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं। बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है और बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है। घर की प्रगति सीधे बच्चों के सपनों को पंख दे रही है।
रजनी के काम को जिला उद्योग कार्यालय का सहारा मिला। जिला उपायुक्त नेहा सिंह के मार्गदर्शन से उन्हें अपने उत्पाद बड़े मंचों तक ले जाने का मौका मिला। उन्होंने नोएडा, सुल्तानपुर और लखनऊ समेत आसपास के जिलों में स्टॉल लगाकर बिक्री की। सबसे बड़ी उपलब्धि तब मिली जब राजस्थान से बड़ा ऑर्डर आया। इसे पूरा करने के लिए रजनी ने करीब 100 महिलाओं को रोजगार दिया। प्रदेश सरकार की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ऐसे प्रयासों को गति मिल रही है। सुल्तानपुर सहित कई जिलों में युवा और महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।






