लखनऊ, 22 मार्च 2026:
यूपी में नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बीते नौ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। गंदे पानी के शोधन को लेकर ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण की रफ्तार कई गुना बढ़ी है। इससे नदियों में गिरने वाले दूषित जल को बड़े पैमाने पर रोका जा रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 से पहले नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में केवल 5 एसटीपी ही स्थापित हो पाए थे। वहीं, 2017 के बाद पिछले नौ वर्षों में 50 से अधिक नए एसटीपी स्थापित किए गए हैं। इस प्रकार राज्य में सीवेज शोधन क्षमता में लगभग 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 160 एसटीपी संचालित हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 5000 मिलियन लीटर (एमएलडी) गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है।
राजधानी लखनऊ भी इस अभियान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां वर्तमान में 9 एसटीपी संचालित हैं जिनकी कुल क्षमता 624.50 एमएलडी है। ये संयंत्र भरवारा, दौलतगंज (शहरी व ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी जैसे स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों के जरिए गोमती नदी और उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले प्रदूषित जल को पहले ही शुद्ध कर लिया जाता है।
इतना ही नहीं, इन एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड वॉटर के पुनः उपयोग की योजना भी चरणबद्ध तरीके से तैयार की जा रही है, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के तहत 3 नए एसटीपी बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर निर्माणाधीन हैं। इनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। इसके अलावा बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ में 4 और नए एसटीपी प्रस्तावित हैं जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी।
इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद लखनऊ की कुल सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल न केवल नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करेगी बल्कि शहरी जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी एक नया मानक स्थापित करेगी।






