लखनऊ, 2 जनवरी 2026:
फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर हाल ही में कानपुर के साइबर क्राइम थाने पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी। वजह थी एक खास जागरूकता फिल्म, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे साइबर ठगी को समझदारी से नाकाम किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा तैयार कराई गई इस लघु फिल्म में नाना पाटेकर ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई है, जो डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही साइबर ठगी का पासा पलट देता है। फिल्म की कहानी में दिखाया गया है कि कैसे साइबर अपराधी खुद 60 हजार रुपये गंवा बैठता है।

फिल्म के अनुसार, एक साइबर जालसाज नाना पाटेकर को फोन करता है और खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताता है। वह कहता है कि नाना के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामलों में एफआईआर दर्ज है और मामला निपटाने के लिए 15 लाख रुपये देने होंगे।
फोन पर बातचीत के दौरान नाना पाटेकर को शक हो जाता है कि सामने वाला ठग है। वह चालाकी से जवाब देते हुए कहते हैं कि उनके पास इतनी बड़ी रकम नहीं है। पत्नी के गहने गिरवी रखे हैं और उन्हें छुड़ाने के लिए ज्वेलर 35 हजार रुपये मांग रहा है। 15 लाख रुपये के लालच में साइबर अपराधी नाना पाटेकर के खाते में 35 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर देता है।
नाना पाटेकर का #DigitalArrest?
क्रांतिवीर मोड ON -> स्कैमर की स्क्रिप्ट फेलयाद रखिए, फ़ोन कॉल पर कोई भी सरकारी एजेंसी ‘गिरफ्तार’ नहीं करती।
ऐसी कॉल्स से डरें नहीं,
तुरंत कॉल काटिये और 1930
या https://t.co/HCCy4vFg33 पर शिकायत दर्ज करिये ।@nanagpatekarhttps://t.co/rUOGwje5d6— UP POLICE (@Uppolice) January 1, 2026
इसके बाद नाना और 25 हजार रुपये की मांग करते हैं, जिसे अपराधी भेज भी देता है। कुछ ही देर में फोन की घंटी बजती है और ठग को समझ में आ जाता है कि जिसे वह ठग रहा था, वही उसे ठग चुका है। नाना उससे कहते हैं कि मुंबई पुलिस कब से रशियन वेबसाइट से एफआईआर भेजने लगी। जालसाज को समझ मे आ जाता है कि वो पकड़ गया।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि यह शार्ट फिल्म कानपुर में सामने आई एक वास्तविक घटना से प्रेरित है, जहां एक जागरूक नागरिक ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी की कोशिश को सूझबूझ से नाकाम कर दिया था। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को सोशल मीडिया के साथ-साथ सिनेमा हॉल में भी दिखाने की तैयारी है।






