
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026:
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC) में देश का मुख्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिरकत की। इस दौरान संत कबीर हैंडलूम अवॉर्ड्स और National Handloom Awards 2025 दिए गए। इस दौरान हैंडलूम सेक्टर के प्रति पीएम के विजन को सराहते हुए 22 बुनकरों को सम्मानित किया।
विरासत को आगे बढ़ाने पर बुनकरों को सराहा
समारोह में वर्ष 2025 के लिए कुल 22 पुरस्कार दिए गए। इनमें तीन संत कबीर हैंडलूम अवॉर्ड और 19 National Handloom Awards शामिल रहे। यह सम्मान उन बुनकरों को दिया गया जिन्होंने पारंपरिक बुनाई, नए डिजाइनों, नवाचार और भारतीय हथकरघा विरासत को आगे बढ़ाने में खास योगदान दिया है।
बुनकरों के लिए नई तकनीक और नए बाजार पर जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करते हुए कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र केवल सांस्कृतिक पहचान नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, करोड़ों लोगों की आजीविका और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी है। भारतीय हथकरघा को नई तकनीक, कौशल विकास, पारदर्शी व्यवस्था और Vocal for Local जैसे अभियानों से लगातार मजबूती मिल रही है। इससे बुनकरों को नए बाजार मिल रहे हैं और भारतीय हैंडलूम की पहचान वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है।

आजादी की लड़ाई से जुड़ा है हथकरघा
हजारों वर्षों से हथकरघा भारत की प्रकृति-पोषक सभ्यता की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें हमारे राष्ट्र की असाधारण विविधता दिखाई देती है। इसने हमारी क्षेत्रीय विशेषताओं को संरक्षित भी किया है। हथकरघे का हमारे स्वतंत्रता संग्राम से गहरा जुड़ाव है। सात अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ था। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं, स्वदेशी उद्योगों और विशेष रूप से देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहन देना था।
युवाओं के लिए नए अवसर सृजन करने की है ताकत
हमारे हथकरघा सेक्टर में भारत की Rural Premium Economy का सबसे सुंदर और मानवीय उदाहरण बनने की संभावनाएं बलवती हुई हैं। युवा entrepreneurs, designers और startups, पारंपरिक शिल्प को नए trends, brands और global value chains से जोड़कर इस क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन कर सकते हैं।

चार स्मारक डाक टिकट और दो खास पुस्तकों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान भारतीय हथकरघा की विविध परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट जारी किए गए। साथ ही दो विशेष प्रकाशनों ‘Earth, Root, Thread- All Dyed Handloom Textiles of Central India’ और ‘Handloom Awards Book 2025’ का भी लोकार्पण किया गया। इन प्रकाशनों में भारत की पारंपरिक बुनाई, रंगाई तकनीकों और पुरस्कार विजेता कारीगरों के काम को विस्तार से शामिल किया गया है।

प्रदर्शनी में दिखी कारीगरों की बारीक कला
समारोह स्थल पर पुरस्कार प्राप्त उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। यहां आने वाले लोगों ने कानी बुनाई और वॉल हैंगिंग बुनाई का लाइव प्रदर्शन देखा। इस दौरान पारंपरिक तकनीकों से तैयार किए जा रहे उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनियां, डिजाइनर कॉन्क्लेव और हथकरघा से जुड़े कई आयोजन भी किए गए।
35 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका से जुड़ा है Handloom Sector
वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक देश का Handloom Sector 35 लाख से अधिक लोगों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध करा रहा है। इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा है। यही वजह है कि सरकार हथकरघा उद्योग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान दिलाने का अहम माध्यम मान रही है।
स्वदेशी आंदोलन की विरासत से जुड़ा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह तारीख 1905 में कोलकाता टाउन हॉल से शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाती है, जिसने भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने का बड़ा अभियान शुरू किया था। वर्ष 2015 में इस दिवस की औपचारिक शुरुआत की गई थी। इस साल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का 12वां संस्करण मनाया गया।समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्घेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, हथकरघा विकास आयुक्त डॉ एम बीना समेत देशभर से आए बुनकर, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।






