अयोध्या, 9 मार्च 2026:
देशभर में सुरक्षित प्राचीन रामायण पांडुलिपियों को एक स्थान पर संजोने की दिशा में बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। इसके तहत अयोध्या में रामायण पांडुलिपियों का राष्ट्रीय भंडार स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय की ओर से देशभर के विद्वानों, संस्थाओं और आम लोगों से प्राचीन रामायण पांडुलिपियों की जानकारी साझा करने का आमंत्रण दिया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री संग्रहालय से अनुरोध किया था कि देशभर से मिलने वाली रामायण पांडुलिपियों को अयोध्या में ही संरक्षित किया जाए। उनका कहना था कि इससे अयोध्या रामायण परंपरा के वैश्विक अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस प्रस्ताव पर सहमति मिलने के बाद अब इन पांडुलिपियों के संरक्षण की योजना अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में बनाई जा रही है।

संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार संस्कृत सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में लिखी गई रामायण पांडुलिपियां आमंत्रित की गई हैं। इनमें ब्राह्मी, देवनागरी, ग्रंथा, सारदा, नंदीनागरी, बंगाली, ओड़िया, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, तमिल, गुजराती और मोदी जैसी पारंपरिक लिपियों में लिखित पांडुलिपियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा वाल्मीकि रामायण, क्षेत्रीय संस्करण, टीकाएं और उप-टीकाएं, ताड़पत्र या कागज पर लिखी सचित्र पांडुलिपियां भी इस पहल का हिस्सा बन सकती हैं।
इस पहल का उद्देश्य रामायण की समृद्ध और प्राचीन परंपरा को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक इस धरोहर को पहुंचाना है। इससे रामायण साहित्य के अध्ययन और शोध को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पांडुलिपियां देने के इच्छुक लोगों से कुछ आवश्यक जानकारियां मांगी गई हैं।
इसमें पांडुलिपि का शीर्षक, अनुमानित आयु, प्रयुक्त लिपि, भौतिक स्वरूप जैसे कागज या ताड़पत्र, आकार और फोलियो संख्या शामिल है। साथ ही प्रथम और अंतिम पृष्ठ के वीडियो नमूने तथा रंगीन तस्वीरें भेजने को प्राथमिकता दी गई है। इच्छुक लोग अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय से संपर्क कर सकते हैं।






