लखनऊ, 18 मार्च 2026:
यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मिशन के अगले चरण की औपचारिक शुरुआत है। इसे हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली है।
एमओयू पर हस्ताक्षर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वर्चुअल माध्यम से किए गए। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि ‘हर घर नल से जल’ के लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए यह समझौता एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इससे जलापूर्ति योजनाओं को बेहतर योजना, समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रभावी परिणामों के साथ लागू किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल के रूप में मिलेगा। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय का उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी। साथ ही उन्होंने पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का संकल्प तेजी से साकार हो रहा है।
प्रदेश में पेयजल व्यवस्था में आए बदलावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले सीमित गांवों तक ही पाइप पेयजल की सुविधा थी लेकिन अब हजारों गांवों में नियमित जलापूर्ति की जा रही है। विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण में स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता योजनाओं की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस केवल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है बल्कि योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। बुंदेलखंड और विंध्य जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में अब घर-घर नल से जल पहुंचना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोपरि बताते हुए राज्यों से टिकाऊ और दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री वी सोमन्ना, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






