Uttar Pradesh

ओडीओपी योजना बनी सक्सेस की चाबी… लोन लेकर खड़ा किया डिजिटल लॉक का कारोबार

अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने शुरू की डिजिटल लॉक यूनिट, कोविड काल में हुई थी स्टार्टअप की शुरुआत, 20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार

लखनऊ, 9 मार्च 2026:

अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने मुश्किल दौर को अवसर में बदलते हुए डिजिटल लॉक निर्माण का सफल कारोबार खड़ा किया है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना से मिली मदद के बाद उन्होंने अलीगढ़ में डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की, जो आज तेजी से आगे बढ़ रही है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन गई है।

नीलम सिंह ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उसी समय देश कोविड महामारी के दौर से गुजर रहा था और आर्थिक गतिविधियां काफी प्रभावित थीं। ऐसे माहौल में उन्होंने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर ऐसा काम शुरू करने का फैसला किया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।

अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए जाना जाता है। इसी पहचान को नई तकनीक के साथ जोड़ते हुए नीलम ने ओव्लॉक्स इंडिया नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट स्थापित की। शुरुआत आसान नहीं थी, क्योंकि आर्थिक संसाधन सीमित थे। ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के सहयोग से बैंक ऑफ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण मिला। इसमें करीब ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी शामिल थी। इस मदद से उनके कारोबार की मजबूत नींव तैयार हुई।

धीरे धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यह यूनिट 10 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रही है। शुरुआत में यहां केवल पांच या छह लोग काम करते थे, लेकिन अब इस यूनिट में 20 से 25 कर्मचारी काम कर रहे हैं। यहां काम करने वाले लोगों की मासिक आय उनके काम के अनुसार लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक है।

इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं। इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी से संचालित किया जा सकता है। आधुनिक तकनीक के कारण ये लॉक पारंपरिक तालों से अलग पहचान बना रहे हैं।

ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में भी भेजे जा रहे हैं। इससे अलीगढ़ के पारंपरिक ताला उद्योग को नई तकनीकी दिशा मिली है और स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों की पहचान अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही है।

नीलम सिंह का कहना है कि पहले अलीगढ़ में ज्यादातर हैंडमेड और चाबी से चलने वाले ताले बनाए जाते थे। इसमें मेहनत ज्यादा होती थी और आमदनी सीमित रहती थी। डिजिटल लॉक के इस नए काम ने उद्योग के स्वरूप को बदल दिया है। आज यहां काम करने वाले लोगों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें यह संतोष भी है कि उनके बनाए उत्पाद देश और विदेश तक पहुंच रहे हैं।

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